जागरण संवाददाता, हरिद्वार: इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) के प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट के प्रावधान के विरोध में एसोसिएशन की जिला इकाई ने 15 सितंबर को अस्पताल, प्रतिष्ठानों को बंद करने की चेतावनी दी है। साथ ही, निर्णय लिया गया कि तालाबंदी कर सांकेतिक रूप से चाबी जिला प्रशासन को सौंपी जाएगी।

एसोसिएशन के जिला इकाई के अध्यक्ष डॉ. जसप्रीत ¨सह, सचिव डॉ. अंजुल श्रीमाली ने बताया कि आइएमए उत्तरांचल शाखा ने निर्णय लिया है कि सभी निजी अस्पताल अपने मरीजों की 13 सितंबर से पहले छुट्टी दे दें। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ¨सह रावत से राज्य पदाधिकारियों को सात सितंबर को होनी वाली बैठक के लिए समय न देने की भी ¨नदा की।

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यह है मांग

-क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 से 50 बेड से कम के अस्पताल, क्लीनिक, डे केयर केंद्रों, डायग्नोस्टिक सेंटर, पैथोलाजी लैब को छूट दी जाए

-50 बेड से ऊपर के अस्पतालों को हरियाणा सरकार के अनुसार रियायत दी जाए

-उपचार दर केवल चिकित्सकों, संस्थानों की ओर से तय की जा सकती है

-कोई भी डायग्नोस्टिक टेस्ट का निर्णय चिकित्सक ही कर सकते हैं, क्योंकि यह मरीज की स्थिति के आधार पर निर्णय लेने के लिए सक्षम है। कोई अधिकारी यह तय नहीं कर सकता है कि कौन सा टेस्ट उपयुक्त है या नहीं।

-केवल जेनेरिक दवाओं को लिखना संभव नहीं है। क्योंकि सरकार की ओर से गुणवत्ता पर उचित नियंत्रण नहीं रखा जाता है। यह भी भेदभावपूर्ण है कि सभी अमीर लोग गैर जेनेरिक दवाएं ले सकते हैं। जबकि गरीब लोगों को केवल जेनेरिक दवाएं लेनी पड़ती हैं।

-फिर भी अगर सरकार केवल जेनेरिक दवाएं चाहती है तो सरकार को ग्लैक्सो, सन फार्मा, नोबार्टिस इत्यादि ब्रांडेड दवाओं का उत्पादन करने वाली सभी फार्मा कंपनियों के लाइसेंस रद्द कर देने चाहिए और किसी भी कंपनी को भारत में ब्रांडेड दवाएं लाने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।

Posted By: Jagran