हरिद्वार, [जेएनएन]: हरिद्वार में वीआइपी घाट अब शंकराचार्य घाट के नाम से जाना जाएगा। इसका नाम बदल दिया गया है। इसकी जानकारी उत्तर प्रदेश सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने दी। 

उन्होंने बताया कि यह घाट उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की संपत्ति है। उन्होंने ऐलान किया कि गंगा के प्रवाह को अविरल रखने के लिए उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग मुख्य धारा में 2500 क्यूसेक पानी छोड़ेगा। 

हरिद्वार में उत्तर प्रदेश  सिंचाई अधिकारियों की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए धर्मपाल सिंह ने कहा कि दोनों प्रदेशों के बीच परिसंपत्तियों के मसले पर बातचीत जारी है। पिछले दिनों 37 नहरें उत्तराखंड को सौंपी जा चुकी है। इसमें 28 हरिद्वार और नौ नहरें उधमसिंह नगर जिले की हैं। 

उन्होंने कहा कि शुक्रताल की धार्मिक महत्ता को देखते हुए सोनाली नदी के घाटों पर जल प्रवाह की निरंतरता बनाए रखने के लिए भी सरकार कदम उठा रही है। सिंचाई मंत्री ने कहा कि इसके लिए बाण गंगा नदी को गंगा से जोड़ने पर विचार किया जा रहा है। कहा कि अब उप्र. और  उत्तराखंड में भाजपा की सरकार है और दोनों राज्यों के अधिकारी बेहतर तालमेल के साथ काम करेंगे। 

बैठक में उप्र. के प्रमुख सचिव सिंचाई सुरेश चंद्रा, प्रमुख अभियंता व विभागाध्यक्ष सिंचाई प्रदीप कुमार सिंह और मुख्य अभियंता गंगा एसके शर्मा मौजूद रहे। 

36 वर्ष पहले बना था वीआइपी घाट

धर्मनगरी में गंगा किनारे वीआइपी घाट 36 वर्ष पहले 1981 में अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय बना था। विभागीय अधिकारियों की मानें तो इसका मकसद हरकी पैड़ी घाट पर भीड़ से विशिष्ट व्यक्तियों को बचाने के लिए इसका निर्माण कराया गया था। 

गंगा किनारे बना यह वीआइपी घाट आज भी उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के नियंत्रण में हैं। विशिष्ट व्यक्ति यहां गंगा स्नान के लिए पहुंचते हैं। इस वीआइपी घाट को कुछ लोग पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण ङ्क्षसह के नाम पर भी बताते हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी इससे इंकार करते हैं। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के उपखंड अधिकारी सुशील यादव ने बताया कि जहां तक कागजों की बात है यह वीआइपी घाट के नाम से दर्ज है। 

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