रुड़की, केके शर्मा। कोरोना संक्रमण से बचाव में उप कारागार रुड़की के अंदर बंदियों की ओर से उगाई जा रही सब्जियां मददगार साबित हो रही है। जेल के बंदियों के लिए प्रतिदिन करीब 75 किलो सब्जी की डिमांड इन्हीं जैविक सब्जियों से पूरी की जा रही है। जेल की चार बीघा जमीन पर सब्जियों की जैविक खेती की गई है।

इस समय पूरा देश कोरोना संक्रमण से जूझ रहा है। इसके चलते लॉकडाउन का दौर भी जारी है। लोग जरूरत का सामान खरीदने के लिए ही घरों से निकलकर बाजार का रुख कर रहे हैं। सब्जी मंडी से लेकर बाजारों में उमड़ रही भीड़ से कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ता जा रही है। 

ऐसे में जेल प्रशासन भी बंदियों को संक्रमण से बचाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है। इसके लिए जेल प्रशासन ने मार्च माह में लॉकडाउन के दौरान जेल परिसर में करीब चार बीघा भूमि पर लौकी, तुरई, बैंगन, टमाटर, भिंडी आदि सब्जियां लगाई थी।

जैविक तरीके से उगाई गई सब्जियों की फसल से अब उत्पादन शुरू हो गया है। ऐसे में बंदियों के खाने के लिए बाहर से सब्जी नहीं खरीदी जा रही है। प्रत्येक दिन दोनों समय की सब्जी की डिमांड जेल में उगी सब्जियों से पूरी की जा रही है। 344 बंदियों के लिए प्रतिदिन 75 किलो सब्जी का इस्तेमाल हो रहा है। मात्र आलू ही बाहर से मंगाए जा रहे हैं। इसके अलावा दाल और अन्य पदार्थों का स्टॉक पहले से ही जेल के अंदर मौजूद है।

जेल में तैयार होता है जैविक खाद

जेल में ही सब्जियों के लिए जैविक खाद तैयार हो रहा है। इसके लिए गहरे गड्ढे बनाए गए हैं। रात और सुबह के समय बंदियों का जो भी खाना बचता है, उसे इन गड्ढों में जमा किया जाता है। इस जैविक खाद का जेल के अंदर उगाई गई सब्जियों में इस्तेमाल किया जाता है। रासायनिक उर्वरक यहां पर प्रतिबंधित किया गया है।

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30 बंदी करते हैं सब्जी की खेती

जेल के अंदर सब्जी उगाने के काम में 30 बंदियों को लगाया गया है। खेती के जानकार बंदियों को ही इस काम में लगाता जाता है। इसके अलावा यह बंदी अन्य बंदियों को भी सब्जी उगाने के गुर बताते हैं। कई बार तो जेल का स्टाफ भी खेती में हाथ बंटाता है।

जेपी द्विवेदी ( जेलर उपकारागार, रुड़की) का कहना है कि जेल के अंदर चार बीघा भूमि पर जैविक तरीके से उगाई गई सब्जियां बंदियों को परोसी जा रही है। कोरोना को देखते हुए बाहर से सब्जी खरीदना बंद है।

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