जागरण संवाददाता, रुड़की: सिविल अस्पताल में सोमवार को पीएमएचएस सवंर्ग (जिन्होंने सरकारी सेवाओं में रहते हुए डिप्लोमा अर्जित किया) के कार्यरत विशेषज्ञ डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार के कारण कई मरीजों को बिना इलाज के ही मायूस लौटना पड़ा। हालांकि, डॉक्टरों ने विशेषज्ञता संबंधी चिकित्सा कार्य तो नहीं किया लेकिन सामान्य मरीजों की जांच की।

राज्य के विशेषज्ञ डॉक्टर एमसीआई की ओर से डिप्लोमा अमान्य करने से नाराज हैं। इसके चलते सोमवार से प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों में कार्यरत 113 विशेषज्ञ डॉक्टरों ने कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है। सिविल अस्पताल रुड़की में भी प्रमुख बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अर¨वद कुमार मिश्रा, वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. महेश खेतान एवं डॉ. महेंद्र ¨सह खाती, रेडियोलॉजिस्ट डॉ. मनीष दत्त और पैथोलोजिस्ट डॉ. रितु खेतान कार्य बहिष्कार पर रहे। इस वजह से अस्पताल में अल्ट्रासाउंड नहीं हो सके। जिस वजह से अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं और अन्य मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। प्रमुख बाल रोग विशेषज्ञ, आई सर्जन के कार्य बहिष्कार के कारण ओपीडी भी प्रभावित रही। हालांकि कार्य बहिष्कार करने वाले डॉक्टरों ने विशेषज्ञता से संबंधित चिकित्सा कार्य नहीं किया लेकिन सामान्य मरीजों की जांच की गई। उधर, कार्य बहिष्कार करने वाले डॉक्टरों की सूची में सिविल अस्पताल के सीएमएस डॉ. डीके चक्रपाणि का भी नाम शामिल रहा लेकिन उनका प्रशासनिक पद होने के कारण उन्होंने प्रतिदिन की तरह ही कार्य किया। सीएमएस डॉ. डीके चक्रपाणि के अनुसार डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था की गई थी। संविदा पर रखे डॉक्टर के माध्यम से मरीजों को चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करवाई गई।

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