जागरण संवाददाता, हरिद्वार: मरम्मत के अभाव में जहां पुराने वार्डो की कई स्ट्रीट लाइट बंद पड़ी है, वहीं नगर निगम में शामिल नये क्षेत्रों के पथ प्रकाश व्यवस्था तो पूरी तरह पटरी से उतर गई है। कई बार शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदार इस ओर गंभीर नहीं हैं। नगर निगम बोर्ड गठन को छह माह से अधिक बीत गया है, लेकिन अभी तक व्यवस्थाएं नहीं सुधर पाई हैं।

नगर निकाय सीमा विस्तार बाद नगर निगम में पांच राजस्व ग्राम ज्वालापुर बाहर हदूद, जगजीतपुर बाहर हदूद, देवपुर मुस्तकीम का संपूर्ण ग्राम, मिस्सरपुर आंशिक और अहमदपुर कड़च्छ आंशिक (विष्णु कॉलोनी) को शामिल कर नौ नये वार्ड बनाए गए। सबसे बड़े राजस्व ग्राम जगजीतपुर से पांच वार्ड गुरुकुल, शिवपुरी, हनुमंतपुरम, जगजीतपुर और राजा गार्डन बनाए गए। करीब छह माह पूर्व पहली दफा शहर की सरकार चुनने को यहां के वोटरों में गजब का उत्साह भी दिखा था। नये क्षेत्रों में विकास की उम्मीदों में युवा भी वोट डालने में पीछे नहीं रहे थे, लेकिन बोर्ड गठन के छह माह बाद भी नये क्षेत्रों की सूरत नहीं बदली है। सफाई व पथ प्रकाश की स्थिति भी बेहद लचर है। अधिकांश वार्डो में दिन ढलते ही अंधेरा पसर जाता है। लक्सर रोड पर बूढ़ी माता मंदिर से लेकर मिस्सरपुर तक तो पथ प्रकाश का कोई इंतजाम नहीं है। जबकि नगर निगम बोर्ड की पहली बैठक में नये क्षेत्रों की पथ प्रकाश व्यवस्था में सुधार को दो हजार नई स्ट्रीट लाइट क्रय करने संबंधी प्रस्ताव को भी बोर्ड की मंजूरी मिल चुकी है। पुराने वार्डो की भी तमाम स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी है। नई बस्ती खड़खड़ी की भी काफी लाइट बंद है। बंधे पर भी अंधेरा पसरा है। अ‌र्द्धकुंभ में लगाई गई हाईमास्ट लाइटें भी बुझी पड़ी है। इससे शहरियों के साथ ही बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वर्जन

सफाई और पथ प्रकाश व्यवस्था में सुधार को लेकर मैं तो गंभीर हूं लेकिन निगम अधिकारी नहीं। 100 अस्थायी कर्मचारी रखने की मांग कई दफा की गई, लेकिन इसे अनसुना किया गया। जबकि बोर्ड से भी प्रस्ताव पारित हो चुका है। दो हजार नई लाइट क्रय करने के प्रस्ताव पर भी बोर्ड की मुहर लग चुकी है। नई लाइटें क्रय होने तक पुरानी लाइनों की मरम्मत करा नये वार्डो में भी लगाने को निर्देशित किया गया, लेकिन निगम अधिकारी अब भी पुरानी चाल चल रहे हैं। नाला गैंग को लेकर सहायक नगर आयुक्त से जवाब मांगा गया है।

अनिता शर्मा, महापौर, नगर निगम, हरिद्वार

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