संवाद सूत्र, भगवानपुर: गन्ना भुगतान की आस लगाए बैठे किसानों को जोर का झटका लगा है। दो साल की चीनी नीलाम करने को सोमवार को बोली लगनी थी, लेकिन एक भी बोली लगाने वाला तहसील मुख्यालय नहीं पहुंचा। अब प्रशासन नए सिरे से नीलामी प्रक्रिया शुरू करने में जुट गया है।

इकबालपुर चीनी मिल पर किसानों का तीन साल का भुगतान बकाया है। बकाया भुगतान को लेकर नन्हेड़ा गांव के किसान नीतिन कुमार ने उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी। याचिका पर उच्च न्यायालय ने छह जनवरी को आदेश दिया था कि प्रशासन पेराई सत्र 2017-18 और पेराई सत्र 2018-19 की गोदामों में जमा चीनी का मूल्यांकन एवं सत्यापन कराने के बाद उसकी नीलामी कराए। दोनों पेराई सत्र की चीनी को 11 फरवरी से पहले नीलाम कर अदालत को अवगत कराया जाए। इस पर प्रशासन ने सोमवार को नीलामी की तारीख तय की थी। सुबह ही अपर जिलाधिकारी केके मिश्रा, एसडीएम संतोष कुमार पांडे, सहायक गन्ना आयुक्त शैलेंद्र सिंह, मुख्य कोषाधिकारी नीतू कंडारी, चीनी मिल के प्लांड हेड सुरेश शर्मा आदि मौजूद रहे। दोपहर दो बजे तक एक भी बोली लगाने वाला मौके पर नहीं पहुंचा। कुर्सियां खाली पड़ी रही। 25 जनवरी से प्रपत्रों की बिक्री की जा रही थी, लेकिन एक भी प्रपत्र नहीं बिका। इसके बाद प्रशासन ने नीलामी की प्रक्रिया को स्थगित कर दिया। सहायक गन्ना आयुक्त शैलेंद्र सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी को इस संबंध में रिपोर्ट भेज दी गई है। जल्द ही नई तारीख मिलने की उम्मीद है।

नीलामी न होने से किसानों में आक्रोश: तीन फरवरी को चीनी की नीलामी को लेकर किसान काफी उम्मीद लगाए थे। सबको उम्मीद थी कि चीनी की बिक्री होने से गन्ने का भुगतान हो जाएगा। भाकियू रोड गुट के प्रदेश अध्यक्ष पद्म सिंह रोड ने कहा कि पहले भी प्रशासन ने चीनी को नीलाम कराने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। इस बार भी ऐसा ही हुआ है। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के प्रदेश अध्यक्ष पद्म सिंह भाटी ने कहा कि यह स्थानीय किसानों के साथ धोखा है। अब तो किसानों को न्यायालय से ही उम्मीद बची है।

Posted By: Jagran

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