जागरण संवाददाता, हरिद्वार: भारतीय जागरुकता समिति की ओर से महिला कानून पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें हाईकोर्ट के अधिवक्ता ललित मिगलानी ने विस्तार से महिलाओं के समस्त अधिकारों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि गर्भपात अपराध है, कानून में गर्भपात करने और उसमें सहयोग करने वाली संस्थाओं को बंद करने तथा कठोर सजा का प्रावधान है। यदि इसकी जानकारी मिलती है तो तत्काल इसकी सूचना देनी चाहिए, जिससे कड़ी कार्रवाई हो सके।

ललित मिगलानी ने कहा कि शिक्षा का अधिकार में हर बालिका व बालक और तृतीय श्रेणी के बच्चे शिक्षा ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि धारा 125 मे हर बच्चा अपने बाप से हर पत्नी अपने पति से हर बुजुर्ग मां बाप अपने बेटे से भरण-पोषण ले सकते हैं। मिगलानी ने बाल अपराध जैसे गंभीर मुद्दे के बारे मे जानकारी देते हुए बताया कि ये कानून की नजर में अपराध है। बाल विवाह करना, कराना और इसमें सहभागिता निभाने वाले भी दंड के भागीदार हैं। बाल विवाह कानून की नजर मे वैध विवाह नहीं है। मिगलानी ने बच्चो को साइबर क्राइम के बारे मे भी बताया। प्रेस क्लब के अध्यक्ष राजेश शर्मा ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशाला से समाज में जागरुकता आती है। डॉ. संध्या ने बताया कि समाज में एक बहुत गलत मानसिकता पनप रही है, जिसमें बच्चियों को बोझ समझा जाता है। समाज मे आज भी इस प्रकार की मानसिकता काफी शर्म की बात है। ट्रैफिक इंस्पेक्टर रविकांत सेमवाल, सीपीयू इंचार्ज डीएस पवार ने छात्राओं को ट्रैफिक नियमों की जानकारी दी। स्थायी लोक अदालत की सदस्य अंजलि महेश्वरी, एटीसी की डिप्टी कमांडेंट अरुणा भारती आदि मौजूद रहीं।

Posted By: Jagran

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