केके शर्मा, रुड़की: बावरिया गिरोह की साल की पहली डकैती से पूरा जिला दहल गया है। माजरी गांव में हुई डकैती की घटना का तरीका बावरिया गिरोह की तरफ इशारा कर रहा है। पुलिस भी यही मानकर चल रही है कि इसी गिरोह ने वारदात को अंजाम दिया है। पुलिस की टीम अब गिरोह की तलाश में मुजफ्फरनगर और बिजनौर समेत अन्य जगहों पर डकैतों की तलाश कर रही है। यह गिरोह रेलवे स्टेशन के आसपास और आबादी से दूर बने मकानों को ही निशाना बनाता है।

हर साल जिले में बरसात के दिनों में बावरिया गिरोह डकैती डालता है। आंकड़ों पर गौर करें तो तीन साल पहले बावरिया गिरोह ने ज्वालापुर के जमालपुर में एक घर में डकैती डाली थी। परिवार के लोगों पर डकैतों का कहर टूटा था। वारदात के दौरान घर में रखा खाना खाया और दूध भी पिया। इसके कुछ दिन बाद बदमाशों ने इमलीखेड़ा और फिर लक्सर में इसी तर्ज पर डकैती डाली थी। इसके बाद साल दर साल इस गिरोह ने जिले में आतंक मचाकर रखा। वर्ष 2017 में भी बदमाशों ने जहाजगढ़, तेज्जूपुर में किसान के घर डकैती डाली गई थी। माजरी गांव में साल की पहली डकैती होने से पुलिस के माथे पर ¨चता की लकीरे खिंच गई है। माजरी गांव में डकैतों ने जिस तरह से बैखौफ होकर पहले घर का दरवाजा तोड़ा और इसके बाद तांडव मचाया। बावरिया गिरोह के लोग वारदात के समय नंगे पांव रहते हैं। महिपाल के घर वारदात करने वाले बदमाश भी नंगे पांव आए थे। सभी के हाथों में लाठी डंडे थे। बदमाशों की वेषभूषा भी इसी तरह की थी। अधिकांश बदमाश जींस टीशर्ट और सेंडो बनियान में थे। सभी बदमाश नकाबपोश थे। महिपाल के घर में भी जिस जगह मवेशी बांधे जाते हैं। वहां भूमि का हिस्सा कच्चा है। वहां पर कई बदमाशों के पांव के निशान की मौजूदगी पुलिस को मिली है। बदमाशों ने वारदात के बाद फ्रिज में रखा खाना भी खाया और दूध भी पिया। इसके अलावा जिस तरह से परिवार के लोगों को बेवजह खून बहाया गया है। इन सब से पुलिस का पूरा शक बावरिया गिरोह पर जा रहा है।

Posted By: Jagran