हरिद्वार, जेएनएन। पतंजलि ने उत्तराखंड आयुर्वेद विभाग की ओर से भेजे नोटिस का जल्द जवाब देने की बात कही है। कोरोनिल को लेकर अपने दावे पर कायम पतंजलि ने फिर साफ किया है कि अश्वगंधा, गिलोय और तुलसी जड़ी बूटियों के पारंपरिक ज्ञान और अनुभव के आधार पर इस औषधि का लाइसेंस लिया गया। सारी विधिसम्मत अनुपालना की है। यहां तक कि पतंजलि आयुर्वेद ने इस औषधि के लेवल पर कोई अवैध दावा भी नहीं किया है। 

पतंजलि की दिव्य फार्मेसी ने मंगलवार को कोरोना की दवा ईजाद करने का दावा किया था। मामला सुर्खियों में आया तो केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने इसका संज्ञान लिया। मंत्रालय ने दिव्य फार्मेसी को नोटिस भेजकर तत्काल दवा के प्रचार-प्रसार पर रोक लगा दी। 24 जून को उत्तराखंड आयुष विभाग ने भी दिव्य फार्मेसी को नोटिस भेजकर दवा के प्रचार प्रसार पर रोक लगा दी। साथ ही सात दिनों के भीतर नोटिस का जवाब देने को कहा था। 

पतंजलि के प्रवक्ता एसके तिजारावाला ने आयुष विभाग की ओर से नोटिस मिलने की पुष्टि करते हुए बताया कि नोटिस का जवाब भी जल्द ही दे दिया जाएगा। हालांकि उन्होंने कहा कि जवाब का कोई औचित्य नहीं बनता। अश्वगंधा, गिलोय और तुलसी जूड़ी बूटियों के पारंपरिक ज्ञान और अनुभव के अनुसार इस औषधि का लाइसेंस लिया गया है। भ्रांति का कोई स्थान नहीं है। 

पतंजलि आयुर्वेद ने इस औषधि के लेवल पर कोई अवैध दावा नहीं किया है। औषधि का निर्माण और बिक्री सरकार की ओर से तय नियम कानून अनुसार होता है। किसी व्यक्तिगत मान्यताओं और विचारधारा के अनुसार नहीं। पतंजलि ने सारी विधिसम्मत अनुपालना की है। 29 जून को ऑर्डर मी एप लांच किए जाने की पतंजलि की घोषणा पर प्रवक्ता तिजारावाला ने बताया कि इसकी जानकारी भी मीडिया को जल्द दे दी जाएगी। 

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बताते चलें कि कोरोनिल टेबलेट लांचिंग के दौरान आचार्य बालकृष्ण ने 29 जून को मंच से कोरोना की दवा समेत पतंजलि के अन्य उत्पाद आमजन तक पहुंचाने के लिए ऑर्डर मी एप लांच किए जाने की भी जानकारी दी थी।

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Posted By: Sunil Negi

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