संवाद सहयोगी, हरिद्वार: नवरात्र साधना के अंतिम दिन गायत्री तीर्थ शांतिकुंज व देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में साधकों ने अपने-अपने अनुष्ठान की पूर्णाहुति दी। महिला मंडल की बहनों ने हवन के बाद कन्या भोज के साथ नवरात्र साधना का समापन किया। इस अवसर पर शांतिकुंज परिसर में बहनों ने 27 कुंडीय तथा देसंविवि परिसर में छात्रों ने नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ सम्पन्न कराया।

इससे पूर्व देव संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पंड्या ने कहा कि मां गायत्री की साधना से साधक में विवेक का जागरण होता है। विवेक मनुष्य को भ्रांतियों से बचाता है और सच्चाई के मार्ग की ओर चलने के लिए प्रेरित करता है। विवेक का धनी हर प्रकार की पीड़ाओं से मुक्त और सदैव प्रसन्नचित्त रहता है। उन्होंने कहा कि विवेकपूर्ण व्यक्ति में न्याय करने की क्षमता आती है और तमाम परिस्थितियों को समान रूप से देखने की बुद्धि विकसित होती है।

उधर शांतिकुंज के मुख्य सत्संग हॉल में केसरी कपिल ने साधना से प्राप्त ऊर्जा को समाज के हित में लगाने के आह्वान किया। इस अवसर नवरात्र अनुष्ठान में आये साधकों ने गायत्री परिवार द्वारा संचालित हो रहे विभिन्न रचनात्मक कार्यक्रम को गति देने का संकल्प लिया। व्यवस्थापक शिवप्रसाद मिश्र के नेतृत्व में श्रीरामनवमी के पावन अवसर पर नामकरण, मुंडन, जनेऊ, गुरुदीक्षा आदि संस्कार सैकड़ों की संख्या में निश्शुल्क सम्पन्न कराये गये। वहीं उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश प्रांतों से आये 18 नवदंपतियों ने पवित्र अग्नि की साक्षी में एक दूसरे का हाथ थामकर वैवाहिक जीवन के सूत्र में बंधे।

Posted By: Jagran

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