हरिद्वार, जेएनएन। बिहार के बाद चमकी बुखार (एक्यूट इंसेफेलाइटिस) ने उत्तराखंड में दस्तक दी है। हरिद्वार जिले में इससे एक व्यक्ति की मौत भी हुई है। सीएमओ डॉ. सरोज नैथानी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि हरिद्वार जिले में चमकी बुखार से यह पहली मौत है। अब विभाग ने भी मान लिया है कि इस व्यक्ति की मौत डेंगू से नहीं, बल्कि चमकी बुखार से हुई है। 

जिले में चमकी बुखार की दस्तक से स्वास्थ्य विभाग सकते में है। गुरुवार सुबह एम्स ऋषिकेश में इलाज के दौरान काशीपुरा बस्ती निवासी 60 वर्षीय एक व्यक्ति की इलाज के दौरान मौत हो गई। इस व्यक्ति की एलाइजा रिपोर्ट में डेंगू की पुष्टि हुई थी। इसलिए पूर्व में स्वास्थ्य विभाग उसकी मौत का कारण डेंगू मान रहा था, लेकिन शुक्रवार को एम्स से मिली रिपोर्ट में व्यक्ति की मौत का कारण एक्यूट इंसेफेलाइटिस, हाइपरकेलेमिया बताया गया है। अब स्वास्थ्य विभाग ने भी चमकी बुखार को ही मौत का कारण माना है।

खुद सीएमओ ने इसकी पुष्टि की है। सीएमओ डॉ. सरोज नैथानी ने कहा कि रिपोर्ट से स्पष्ट है कि काशीपुरा निवासी मरीज की मौत डेंगू नहीं, बल्कि चमकी बुखार से हुई है। फिर भी एहतियात के तौर पर काशीपुरा में डेंगू से रोकथाम के लिए विभाग ने लोगों को जागरूक करने के साथ ही क्षेत्र में स्प्रे भी कराया है। 

कैसे काम करता है चमकी बुखार का वायरस

चमकी मानव मस्तिष्क से जुड़ी बीमारी है। हमारे मस्तिष्क में लाखों कोशिकाएं और तंत्रिकाएं होती हैं। इनके सहारे शरीर के अंग काम करते हैं। जब इन कोशिकाओं में सूजन या कोई अन्य दिक्कत आती है, तो इसे ही एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम यानी चमकी बुखार कहते हैं।

क्या हैं चमकी बुखार के लक्षण 

-इसमें शुरुआत में तेज बुखार आता है।

-शरीर में ऐंठन शुरू हो जाती है। 

-तंत्रिका तंत्र काम करना बंद कर देता है।

-इसमें ब्लड शुगर लो हो जाता है।

-बच्चे तेज बुखार की वजह से बेहोश हो जाते हैं और उन्हें दौरे भी पड़ने लगते हैं।

-जबड़े और दांत कड़े हो जाते हैं। 

-बुखार के साथ ही घबराहट भी शुरू होती है और कई बार कोमा में जाने की स्थिति भी बन जाती है।

चमकी बुखार में क्या करें 

-पानी पिलाते रहे, इससे उन्हें हाइड्रेट रहने और बीमारियों से बचने में मदद मिलेगी।

-तेज बुखार होने पर पूरे शरीर को ताजे पानी से पोछें 

-पंखे से हवा करें या माथे पर गीले कपड़े की पट्टी लगाएं, ताकि बुखार कम हो सके

- शरीर से कपड़े हटा लें और उसकी गर्दन सीधी रखें। 

- डॉक्टर की सलाह के बाद पैरासिटामोल या अन्य सिरप दें

-अगर मुंह से लार या झाग निकल रहा है तो उसे साफ कपड़े से पोछें, जिससे सांस लेने में दिक्कत न हो 

-बच्चों को लगातार ओआरएस का घोल पिलाते रहें। बेहोशी व दौरे आने की स्थिति में मरीज को हवादार जगह पर लिटाएं। 

चमकी के लक्षण दिखें तो ऐसा करें

ओआरएस या नींबू, पानी और चीनी का घोल पिलाएं। रात में भरपेट खाना खिलाकर ही सुलाएं. चीनी, नमक का घोल, छाछ, शिकंजी के अलावा तरबूज, खरबूज, खीरे जैसी चीजों का खूब सेवन करें। 

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डेंगू का लार्वा कराया नष्ट

डेंगू के बढ़ते कहर को देखते हुए शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने विवेक विहार, शिवलोक, इंद्राबस्ती, काशीपुरा, कनखल के विष्णु गार्डन, संदेश नगर आदि में लारवा तलाशकर उसे नष्ट कराया। जिला मलेरिया अधिकारी गुरनाम सिंह ने बताया डेंगू के लार्वा को नष्ट कराने के साथ ही डेंगू के लक्षण, कारण, बचाव आदि के लिए पंफलेट बांटकर जागरुक किया जा रहा है। 

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Posted By: Raksha Panthari

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