‘मुझे लगा कि मेरा करियर खत्म…’ एनएसए अजीत डोभाल ने सुनाया खुफिया मिशन का किस्सा, युवाओं को दिया बड़ा संदेश
एनएसए अजीत डोभाल ने आईआईटी रुड़की के दीक्षा समारोह में छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए अपने जीवन के अनुभव और खुफिया विभाग की चुनौतियों को साझा किया।

HighLights
एनएसए अजीत डोभाल ने आईआईटी रुड़की दीक्षा समारोह को संबोधित किया।
उन्होंने सिक्किम के खुफिया मिशन का पुराना किस्सा सुनाया।
युवाओं को राष्ट्र हित में ऊर्जा लगाने का संदेश दिया।
जागरण संवाददाता, रुड़की। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के दीक्षा समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने खुफिया विभाग के सामने आने वाले खतरों एवं चुनौतियां के साथ ही अपने जीवन के अनुभव छात्र-छात्राओं के साथ साझा किए। एनएसए ने कहा कि युवा पीढ़ी के पास अपार संभावनाएं हैं। युवा अपनी ऊर्जा एवं क्षमता का उपयोग राष्ट्र हित में करें।
समारोह में एनएसए ने छात्र श्रीवरदन बालाजी को प्रेसीडेंट गोल्ड मेडल, नवनीत कुमार को डायरेक्टर गोल्ड मेडल और भारत के राष्ट्रपति डा. शंकर दयाल शर्मा गोल्ड मेडल आशी जैन को प्रदान किया। वहीं संस्थान ने एनएसए अजीत डोभाल को विशिष्ट लोक सेवा के लिए 'आनोरिस कौसा' उपाधि प्रदान कर सम्मानित किया।
आईआईटी रुड़की के दीक्षांत भवन में शनिवार को राष्ट्र गीत वंदे मातरम् और संस्थान के कुलगीत के साथ दो दिवसीय दीक्षा समारोह का शुभारंभ हुआ। दीक्षा समारोह में प्रथम दिवस मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल उपस्थित रहे।
छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए एनएसए अजीत डोभाल ने कहा कि वे उनके बीच आकर इस दुविधा में हैं कि उनसे क्या विचार साझा करें? क्योंकि छात्रों और उनकी उम्र में करीब 60 साल का अंतर है। ऐसे में वह कुछ कहानी के माध्यम से अपने विचार साझा करेंगे।
अपने करियर के शुरुआती दिनों में सिक्किम में खुफिया मिशन पर काम करने के अनुभव साझा करते हुए कहा कि एक बार जब भारतीय एजेंट्स मिशन पर थे तो खुफिया टीम रास्ता भटक कर सीमा पार चली गई थी। ऐसे में सब चिंतित हो गए थे। चीनी सेना ने कुछ समय के लिए उन्हें हिरासत में ले लिया था। हालांकि, बाद में उन्हें सुरक्षित छोड़ दिया गया था। लेकिन उस वक्त उन्हें लगा था कि उनका करियर खत्म हो गया है।
उन्होंने कहा कि यदि जीवन में इन तीन बात को जान लिया जाए तो मंजिल तक पहुंचना मुश्किल नहीं है। हम कहां पर हैं, कहां जाना चाहते हैं और वहां जाने एवं वापस आने का रास्ता क्या है। इन तीन बात ने उन्हें काफी प्रभावित किया है। कहा कि जीवन और परिस्थितियां हर क्षण बदलती हैं। ऐसे में इसके लिए हमेशा तैयार रहने की जरुरत है।
एनएसए ने कहा कि आईआईटी रुड़की जैसे संस्थान के दीक्षा समारोह का हिस्सा बनना उनके लिए गौरव की बात है। इस संस्थान ने शिक्षा, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार में उत्कृष्टता के माध्यम से राष्ट्र के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है। भारत के सामने मौजूद चुनौतियों के लिए ऐसे युवा पेशेवरों और शोधकर्ताओं की आवश्यकता है जो नवोन्मेषी ढंग से सोच सकें, ईमानदारी के साथ कार्य करें और उद्देश्य की मजबूत भावना के साथ योगदान दें।
वहीं, बतौर विशिष्ट अतिथि चीफ आफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने कहा कि आईआईटी रुड़की के दीक्षा समारोह का हिस्सा बनकर और इसके स्नातक विद्यार्थियों के जीवन में आए इस महत्वपूर्ण पड़ाव का साक्षी बनकर उन्हें प्रसन्नता हो रही है।
