गंगा किनारे कथित अवैध निर्माण, एनजीटी सख्त; डीएम को सख्त कार्रवाई के निर्देश
एनजीटी ने हरिद्वार में गंगा किनारे कथित अवैध निर्माण पर सख्त रुख अपनाया है।


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जागरण संवाददाता, हरिद्वार। गंगा नदी के बाढ़ क्षेत्र में कथित अवैध निर्माण के मामले को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने गंभीरता से लेते हुए हरिद्वार के जिलाधिकारी को शिकायत की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
एनजीटी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि पहले यह तय किया जाए कि संबंधित निर्माण गंगा के अधिसूचित बाढ़ क्षेत्र के भीतर है या नहीं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार त्वरित कार्रवाई की जाए।
गंगा से 100 मीटर के भीतर हो रहा निर्माण
आवेदन में आरोप लगाया गया था कि ग्राम बिशनपुर झरड़ा आहतमाल, तहसील एवं जिला हरिद्वार स्थित खसरा संख्या 468 में गंगा नदी के निकट अवैध निर्माण कराया जा रहा है। दावा किया गया कि यह निर्माण गंगा से 100 मीटर के भीतर हो रहा है। जबकि एनजीटी ने ऐसे क्षेत्र में स्थायी निर्माण पर प्रतिबंध लगाया हुआ है।
एनजीटी की प्रधान पीठ नई दिल्ली ने आवेदन पर सुनवाई करते हुए इस संबंध में यह आदेश पारित किया। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव (अध्यक्ष) और विशेषज्ञ सदस्य डा. अफरोज अहमद की पीठ ने की।
सुनवाई के दौरान एनजीटी ने कहा कि किसी भी निर्माण की वैधता तय करने से पहले यह आवश्यक है कि पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत जारी रिवर गंगा (पुनर्जीवन, संरक्षण एवं प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश, 2016 के अनुसार संबंधित क्षेत्र के बाढ़ क्षेत्र (फ्लड प्लेन) का सीमांकन स्पष्ट हो।
पीठ ने पाया कि रिकार्ड पर ऐसा कोई ठोस दस्तावेज उपलब्ध नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि संबंधित भूमि गंगा के बाढ़ क्षेत्र में आती है अथवा नहीं। सुनवाई में आवेदक के अधिवक्ता ने यह भी बताया कि 25 फरवरी 2025 को इस मामले की शिकायत जिलाधिकारी हरिद्वार, जो जिला गंगा संरक्षण समिति के अध्यक्ष भी हैं, को दी गई थी, लेकिन अब तक उस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया।
इन तथ्यों को देखते हुए एनजीटी ने मूल आवेदन का निस्तारण करते हुए जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि शिकायत पर नियमानुसार विचार किया जाए। संबंधित स्थल का भौतिक सत्यापन कराया जाए और यह निर्धारित किया जाए कि निर्माण प्रतिबंधित क्षेत्र में स्थायी निर्माण की श्रेणी में आता है या नहीं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पक्ष को सुनवाई का अवसर देकर शीघ्र कार्रवाई की जाए।
