मनीष कुमार, हरिद्वार : शहर में नासूर बन चुकी जलभराव की समस्या का अब तक स्थायी हल नहीं ढूंढा जा सका है। चंद्राचार्य चौक पर जलभराव से निजात दिलाने को अमृत योजना से करीब चार करोड़ की लागत से नालों का निर्माण शुरू कराया गया। लेकिन, डेढ़ साल बाद भी कार्य पूरा नहीं हो पाया है। 1966 मीटर में से 1616 मीटर ही नाले का निर्माण हो पाया है। आवास विकास के पास जिस बड़े नाले के पुनर्गठन का कार्य होना था वह भी रसूखदारों के अतिक्रमण के चलते अधर में है।

मानसून सीजन में जलनिकासी नहीं होने से चंद्राचार्य चौक, भगत सिंह चौक आदि स्थानों पर पानी जमा हो जाता है। जिससे वाहनों की रफ्तार थम जाती है। घर और प्रतिष्ठानों में पानी घुसने से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। हर बार जनप्रतिनिधियों और स्थानीय प्रशासन की ओर से समस्या के निराकरण का आश्वासन दिया जाता है। लेकिन, अब तक नतीजा सिफर रहा है। समस्या से स्थायी निजात दिलाने को करीब दो साल पहले अमृत योजना से 46 करोड़ का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। इसमें अवधूत मंडल से शिवमूर्ति और चंद्राचार्य चौक से गंगा कैनाल के दोनों ओर नाला निर्माण के अलावा आवास विकास के पास नाले के सुदृढ़ीकरण का प्रस्ताव शामिल था। भेल क्षेत्र की ओर से भगत सिंह चौक और चंद्राचार्य चौक की ओर आने वाले वर्षा जल को रोकने के लिए भेल क्षेत्र में करीब एक हेक्टेयर भूमि पर दो तालाबों का निर्माण और इसमें संग्रहित वर्षा जल को पंप कर सूखी नदी में छोड़ने का प्रस्ताव भी शामिल था। तालाबों के निर्माण के लिए भेल की ओर से भूमि न मिलने से करीब 34 करोड़ की बड़ी पंपिग परियोजना को स्वीकृति नहीं मिली। हालांकि डेढ़ साल पहले 3.96 करोड़ से चंद्राचार्य चौक से गंगा कैनाल और अवधूत मंडल से शिवमूर्ति तक दोनों ओर नाला निर्माण का कार्य शुरू हुआ। बीते साल नवंबर तक कार्य पूर्ण होने का दावा किया गया था लेकिन अब तक 1616 मीटर नाले का निर्माण ही पूरा हो पाया है। आवास विकास नाले के ऊपर अतिक्रमण के चलते कार्य भी अब तक अधर में है। नाले की चौड़ाई गंगा कैनाल की ओर सात मीटर जबकि शुरुआत में अतिक्रमण के चलते करीब चार मीटर है। इसके चलते 450 में 350 मीटर नाला अधूरा है।

वैकल्पिक व्यवस्था पर लाखों खर्च

हरिद्वार : जलनिकासी की वैकल्पिक व्यवस्था पर श्री चंद्राचार्य चौक पर पंपिग सेट लगाया जा रहा है। इस पर करीब 18 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। जबकि चंद्राचार्य चौक पर अमृत योजना से नाले के निर्माण के दौरान जिम्मेदारों की ओर से दावा किया गया था कि बरसात में यहां जलभराव नहीं होगा। पंपिग सेट आदि लगाने पर होने वाला खर्च भी बचेगा।

2010 में हुआ था लाखों का नुकसान

हरिद्वार : वर्ष 2010 में भारी बारिश के चलते जलभराव की मार शहरवासियों को झेलनी पड़ी थी। राजनेताओं और सरकारी मशीनरी ने जमकर फजीहत झेली थी। हैरत की बात यह कि आज भी स्थिति जस की तस है। 10 अगस्त 2017 में श्री चंद्राचार्य चौक पर जलभराव के चलते शहर की सियायत चरम पर रही थी। वर्जन:::::

जिलाधिकारी के आदेश पर श्रीचंद्राचार्य चौक पर जलभराव की समस्या से निजात दिलाने को पंपिग सेट की व्यवस्था की जा रही है। पीआरडी जवान की भी तैनाती की गयी है। मानसून सीजन तक चौक पर यह व्यवस्था रहेगी। डीजल, लेबर आदि पर करीब 18 लाख रुपये खर्च होंगे।

मोहम्मद मीसम, अधिशासी अभियंता, पेयजल निगम, हरिद्वार

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