जागरण संवाददाता, हरिद्वार। उत्तराखंड सरकार चार धाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड पर पुनर्विचार करेगी। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने हरिद्वार में विश्व हिंदू परिषद की केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक में इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार बोर्ड के अधीन चारधाम को छोड़कर अन्य 51 मंदिरों को बोर्ड के नियंत्रण से मुक्त करने पर पुनर्विचार करेगी। 

पिछले वर्ष फरवरी में त्रिवेंद्र सरकार के शासनकाल में चारधाम और उनसे जुडे मंदिरों की व्यवस्था को लेकर उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन अधिनियम अस्तित्व में आया था। इसके तहत देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड का गठन किया गया। चारधाम के तीर्थ पुरोहित इस अधिनियम का शुरू से ही विरोध करते आ रहे हैं। तीर्थ पुरोहितों का आरोप है कि अधिनियम उनके हितों पर कुठाराघात है। यही नहीं, जब यह अधिनियम लाया गया और बोर्ड का गठन किया गया तो तब भी उन्हें विश्वास में नहीं लिया गया। 

शुक्रवार को विहिप की मार्गदर्शक मंडल की बैठक में सरकार से देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की मांग की गई। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि संत समाज के पथ-प्रदर्शक होते हैं और वह उनके दिखाए रास्ते का अनुसरण करते हैं। संतों की वाणी को शिरोधार्य है और वह उन्हें कभी निराश नहीं होने देंगे। 

मुख्यमंत्री की इस घोषणा का संतों ने स्वागत किया। जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने इसका स्वागत करते हुए कहा कि इससे अन्य राज्यों की सरकारों लिए निर्णय लेने का मार्ग प्रशस्त होगा।  महानिर्वाणी पीठाधीश्वर स्वामी विशोकानंद गिरि ने भी इसकी सराहना की।

कुंभ क्षेत्र में मांस-मदिरा की बिक्री पर रहेगा प्रतिबंध

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने संतों की मांग पर पूरे कुंभ क्षेत्र को मांस-मदिरा मुक्त करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। कहा कि सभी अखाड़ों, महामंडलेश्वरों, मठ-मंदिरों, आश्रम और धार्मिक संस्थाओं को भूमि आवंटन के लिए स्थाई डिजिटल व्यवस्था की जाएगी।

आरटीपीसीआर की रिपोर्ट है तो पंजीकरण जरूरी नहीं

मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि कोरोना संक्रमण के दौरान विपरीत परिस्थितियों में कुंभ को दिव्य और भव्य बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। कहा कि कुंभ में संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं की सुविधा को हर संभव व्यवस्था की गयी है। आरटीपीसीआर जांच और पंजीकरण की बाध्यता संबंधी सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि श्रद्धालु आरटीपीसीआर जांच की निगेटिव रिपोर्ट लेकर आते हैं और उनका पंजीकरण नहीं है तो भी उन्हें रोका-टोका नहीं जायेगा। यहां तक कि अगर कोई बिना जांच के ही आ जाता है तो सीमा पर उनकी जांच के इंतजाम किए गए हैं, वह वहां जांच करा कुंभ स्नान को हरिद्वार आ सकता है।  कहा कि सीमा और शहर में कोरोना जांच की व्यवस्था को और बढ़ाया जा रहा है। 

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