हरिद्वार, जेएनएन। दक्षिण भारत के प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता पवन कल्याण ने कहा कि गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे, तभी गंगा की अविरलता और निर्मलता बचेगी। कहा कि गंगा रक्षा के आंदोलन में अब मातृसदन के साथ दक्षिण भारत भी प्रमुख भूमिका निभाएगा। इसके लिए बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर युवाओं को आंदोलन से जोड़ा जाएगा।

शनिवार को मातृसदन आश्रम में पूर्व प्रोफेसर जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के प्रथम वार्षिक बलिदान दिवस को संकल्प सभा रूप में मनाया गया। इसमें बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे अभिनेता पवन कल्याण ने कहा कि सानंद के इस तरह दुनिया से जाने का दोषी हर भारतीय है, क्योंकि गंगा की समस्या सबकी समस्या है और इसे दूर करने की जिम्मेदारी भी हम सबकी है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार गंगा के प्रति संवेदनशील होती तो ऐसा नहीं होता। गंगा की समस्या से अन्य नदियां भी ग्रसित हैं। इसलिए अब देश के हर प्रांत में गंगा रक्षा के लिए आंदोलन होगा।

इस मौके पर स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि गंगा रक्षा को अब मातृसदन की मातृ शक्ति साध्वी ब्रह्मचारिणी पद्मावती अपने प्राणों का त्याग करने के लिए तैयार हैं। कहा कि सरकार संकल्पों को पूरा नहीं करती है तो जल्द ही मातृसदन तप शुरू करेगा।

पर्यावरणविद् रवि चोपड़ा ने कहा कि बिना बलिदान न तो गंगा शांत होगी और न ही सरकार बिना बलिदान मानेगी। इसलिए अब सरकार को और बलिदान दिया जाएगा। जल पुरुष डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार को जगाने के लिए समाज तथा युवा मिलकर आगे के आंदोलन को चलाएंगे। इस मौके पर रमेश शर्मा, बसवराज पाटिल, सत्या, विक्रमभाई, भोपालसिंह चौधरी आदि मौजूद रहे।

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अभिनेता की झलक पाने को पहुंचे युवा

दक्षिण भारतीय फिल्म अभिनेता पवन कल्याण के शनिवार को जैसे ही मातृदन आश्रम पहुंचने की जानकारी गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले आंध्र प्रदेश के छात्रों को लगी तो वह आश्रम पहुंच गए। आश्रम के गेट पर पवन कल्याण की झलक पाने को युवा काफी देर बाहर खड़े रहे। इसके बाद जब श्रद्धांजलि सभा समाप्त हुई तो पवन कल्याण को आश्रम में घूमते देख युवा प्रफुल्लित हो उठे। बाद में जब पवन कल्याण को पता चला कि यह युवा आंध्र प्रदेश के हैं और उनसे मिलना चाहते हैं तो उन्होंने छात्रों को अपने पास बुला लिया। छात्रों ने का कहना था कि आंध्रप्रदेश में पवन कल्याण से मिलने के लिए प्रशंसक तरसते हैं, लेकिन वह आज उनसे मिलकर अपने को भाग्यशाली मान रहे हैं।

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