रुड़की, जेएनएन। काशीपुरी में सुनहरा रोड पर स्थित बर्फखाने की पाइप लाइन से अमोनिया गैस का रिसाव होने से 12 से अधिक लोगों की तबीयत बिगड़ गई। जहरीली गैस से मची अफरातफरी के दौरान भागते समय एक युवक घायल हुआ। जिसे सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दमकल की टीम ने आक्सीजन मॉक्स लगाकर किसी तरह से अमोनिया गैस की पाइप लाइन को बंद किया। जहरीली गैस की चपेट में आकर कई लोग रात भर परेशान रहे।

गंगनहर कोतवाली क्षेत्र में काशीपुरी में सुनहरा रोड पर एक बर्फखाना है। शुक्रवार की रात करीब एक बजे बर्फखाना में पाइप लाइन से अमोनिया गैस का रिसाव होने लगा। देखते ही देखते अमोनिया गैस चारों तरफ फैल गई। बर्फखाना के आसपास स्थित घरों तक जब अमोनिया गैस पहुंची तो लोगों के दम घुटने लगा। लोग डर के मारे घरों से बाहर आ गए। अमोनिया गैस से किसी की आंखों में जलन हो गई तो किसी को सांस लेने में परेशानी होने लगी। अमोनिया गैस से बचने के लिए लोग इधर उधर भागने लगे। इस आपाधापी मनीष निवासी सुनहरा रोड सड़क पर गिर पड़ा। सड़क पर गिरने से उसके पांव में चोट लगी। 

इस बीच किसी ने इसकी सूचना गंगनहर पुलिस और दमकल की टीम को दी। सूचना मिलने पर पुलिस और दमकल की टीम मौके पर पहुंची। दमकल टीम ने आक्सीजन मॉक्स लगाकर मशक्कत के बाद पाइप लाइन को बंद कर अमोनिया के रिसाव को रोका। इस दौरान लोगों को अमोनिया गैस से काफी परेशानी रही। अमोनिया गैस की चपेट में आने से 12 से अधिक लोगों को बैचेनी, आंखों में जलन और उल्टी की शिकायत रही। जिसे लेकर लोगों के हाथ पांव फूले रहे। गंगनहर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक राजेश साह ने बताया कि पुलिस को इस मामले में अभी तक तहरीर नहीं मिली है।

आबादी में चल रहे प्लांट 

शहर से देहात तक आबादी में कई प्लांट चल रहे है। जिनमें बर्फखाना, कोल्ड स्टोर है। कई बार इस तरह की घटना हो चुकी है। इसके बावजूद प्रशासन इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

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आबादी में कोल्ड स्टोर या बर्फखाना को संचालित नहीं किया जा सकता। इन दम घोटू प्लांट को संचालित करने के लिए बकायदा प्रशासन से अनुमति लेनी पड़ती है। इसके बावजूद आबादी में इस तरह के दम घोटू प्लांट चलाने के लिए आखिर प्रशासन की तरफ से कैसे अनुमति मिल रही है। बिना अनुमति के यह दम घोटू प्लांट चल रहे हैं तो इन पर अधिकारी कार्रवाई करने से क्यों बच रहे है। शुक्रवार की रात को जिस तरह से मामला हुआ, उससे रात भर लोग दहशत में रहे। बच्चों की हालात तो ज्यादा खराब हो गई थी। दमकल की टीम ने अमोनिया गैस का प्रभाव कम करने के लिए पानी का छिड़काव किया। 

अमोनिया गैस पानी में घुलनशील होती है। जिसके कारण पानी का छिड़काव होते ही। वहां के वातावरण में फैली अमोनिया गैस का प्रभाव धीरे धीरे कम होने लगा। दमकल की टीम यदि समय रहते कार्रवाई न करती तो स्थिति बदतर हो सकती थी। यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी इस तरह के मामले हो चुके है। भगवानपुर में हाईवे पर भी एक बर्फखाने में एक साल पहले अमोनिया का रिसाव होने से अफरातफरी मच गई थी। भगवानपुर, मंगलौर, झबरेड़ा और रुड़की में आबादी के पास ही इस तरह के प्लांट चल रहे है। प्रशासन को भी शायद किसी हादसे का इंतजार है। रात को हुई इस घटना को लेकर लोगों में रोष है। लोग आबादी से इस तरह के प्लांट हटाये जाने की मांग प्रशासन से कर रहे है।

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Posted By: Raksha Panthari

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