जागरण संवाददाता, हरिद्वार। Karwa Chauth 2021 करवा चौथ इस वर्ष रोहिणी नक्षत्र और रविवार के दिन है। इस दिन दशरथ चतुर्थी होने के कारण इसका अधिक महत्व है। रोहिणी नक्षत्र में इस व्रत को सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना है। भगवान श्रीकृष्ण का रोहिणी नक्षत्र में ही जन्म हुआ था। करवा चौथ के दिन सौभाग्यवती स्त्रियां अपनी शक्ति को परखने के लिए पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं और संकल्प करती हैं कि अपने पति की लंबी आयु, घर-परिवार की सुख-समृद्धि का।

इस दिन विशेष रूप से भगवान शिव और पार्वती का पूजन किया जाता है, इसी के साथ-साथ भगवान गणेश और भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय भगवान के भी पूजन का आह्वान किया जाता है। महत्वपूर्ण यह है कि कथाशास्त्रों में वर्णित है सभी सुहागिनों को इस दिन एक साथ मिलकर, एकत्र होकर करवा चौथ की कथा सुननी चाहिए। ऐसा करने से इस व्रत का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। शास्त्रों में वर्णन आया है कि सत्यवान के प्राण बचाने वाली सावित्री ने भी निरंतर करवा चौथ का व्रत अपने जीवन में किया था, उसी का परिणाम था कि वह यमराज के मुख से भी वह अपने पति के प्राणों को वापस ले आई थी। तभी से यह प्रथा चली आ रही है।

भारतीय थलसेना के अवकाश प्राप्त धर्मगुरु, पूर्व प्राचार्य उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय ज्योतिष एवं वास्तु विभाग तथा शक्ति ज्योतिष केंद्र के परमाध्यक्ष ज्योतिषाचार्य पंडित शक्तिधर शर्मा 'शास्त्री' बताते हैं कि इस वर्ष करवा चौथ के दिन चंद्रमा का उदय हरिद्वार शहर में रात्रि आठ बजे होगा। कहा कि व्रत के अनुसार सुहागिनों को इस दिन चंद्रमा को अर्घ्‍य देने के पश्चात अपने पति के दर्शन करके उनका आशीर्वाद लेकर, चरण स्पर्श करके उनको भोजन आदि कराने के पश्चात स्वयं भी प्रसाद के रूप में भोजन ग्रहण करना चाहिए। इसके साथ ही यथाशक्ति व सामर्थ्‍य के अनुसार अपने सास-ससुर को सम्मान के साथ कुछ उपहार भेंट करना चाहिए।

विष्णवे नम: मंत्र का जाप करने समस्त ग्रहों का अशुभ फल नष्ट हो जाएंगे

ज्योतिषाचार्य पंडित शक्तिधर शर्मा 'शास्त्री' के अनुसार इस वर्ष बृहस्पति के नीच राशि में हैं, यह पति के लिए कष्ट कारक होता है। इसलिए बृहस्पति को प्रसन्न करने के लिए करवा चौथ के दिन 'विष्णवे नम:' मंत्र का जाप करने से समस्त ग्रहों का अशुभ फल नष्ट हो जाता है और महिलाओं की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। पति स्वस्थ एवं दीर्घायु होते हैं। इसमें भगवान विष्णु की उपासना बहुत फलदाई होगी। उन्होंने बताया कि ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार स्त्री की कुंडली में बृहस्पति ग्रह पति का कारक माना गया है।

बृहस्पति जब नीच राशि में होता है तो गोचर में पति के लिए कष्ट कारक होता है, यह बात यहां इसलिए उल्लेखनीय हैं कि जिन स्त्रियों की कुंडली में बृहस्पति शत्रु राशि में या नीच राशि में या किसी ऐसे स्थान पर स्थित है जो कष्ट कारक होता है। तो ऐसी स्थिति में उस बृहस्पति की शांति के लिए बृहस्पति का दान पूजा या भगवान विष्णु की पूजा करने से ग्रह अनुकूल हो जाते हैं।