रुड़की, [जेएनएन]: आइआइटी रुड़की दस करोड़ की लागत से 'नवोन्मेष' नामक डिजाइन इनोवेशन सेंटर (डीआइसी) की स्थापना करेगी। इस सेंटर का उद्देश्य हिमालय क्षेत्र की समस्याओं को दूर करना है। इसके लिए क्षेत्र के संसाधनों का उपयोग करने के साथ ही राष्ट्र की प्राथमिकताओं का भी ध्यान रखा जाएगा। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से इसके लिए संस्थान को बजट उपलब्ध कराया जाएगा। 

हिमालय क्षेत्र के साथ पूरे देश के लिए इस सेंटर की अहमियत बताते हुए संस्थान के निदेशक प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि डीआइसी का लक्ष्य खासकर हिमालयी क्षेत्र के लिए उपयुक्त उत्पाद तैयार करना है और यह उत्पाद ऐसे होंगे, जोकि विकास के इनोवेटिव प्रस्तावों को पूरा सहयोग देंगे। जन-जन तक पहुंचने के लिए इसके कुछ अनोखे कार्यक्रम हैं जैसे-कोमल (कॉमन मैन टू लेबोरेटरी), इसके तहत डीआइसी आम लोगों से संपर्क करेगा। प्रो. चतुर्वेदी के अनुसार अक्सर कई लोगों के पास इनोवेटिव आइडिया होते हैं, लेकिन सही मार्गदर्शन के अभाव में हमें उनका लाभ नहीं मिल पाते हैं।

 उन्होंने उम्मीद जताई कि डिजाइन इनोवेशन सेंटर के साथ अपने स्पोक पार्टनरों की सहायता से हम खासकर इस क्षेत्र की समस्याओं पर केंद्रित करने में कामयाब रहेंगे, जिसका पूरे समाज को लाभ होगा। निदेशक ने कहा कि डीआइसी बनाने के लिए आइआइटी रुड़की को चुना जाना बहुत खुशी की बात है। इसके लिए संस्थान के पास पहले से ही ईको सिस्टम है। डीन (स्पांसर्ड रिसर्च एवं इंडस्ट्रियल कंसल्टेंसी) प्रो. मनोरंजन परिदा ने कहा कि डीआइसी एक अनोखा मॉडल बनेगा, जोकि समाज, उद्योग जगत और अन्य भागीदारों के साथ परस्पर सहयोग से कार्य करने पर जोर देगा।

क्षेत्र के दिव्यांगों की जरूरतों को पूरा करना पहली प्राथमिकता होगी। डीआइसी स्थापित करने के आइआइटी रुड़की के प्रयास को मंत्रालय की एक राष्ट्रीय पहल के तहत स्वीकृति दी गई है। इसका मकसद डिजाइन इनोवेशन सेंटर, ओपन डिजाइन स्कूल और नेशनल डिजाइन इनोवेशन नेटवर्क का विकास करना है। डीआइसी के कोऑर्डिनेटर प्रो. अपूर्व कुमार शर्मा के अनुसार यह सेंटर आइआइटी की इनोवेटिव कम्यूनिटी को उनके आइडिया को उत्पाद में बदलने का प्लेटफॉर्म देगा। सेंटर में निर्माण के चुनिंदा उपकरणों के साथ एक प्रयोगशाला होगी और परीक्षण संयंत्रों का विकास किया जाएगा। इनमें हाई-एंड मशीनिंग सेंटर, को-आर्डिनेट मेजरिंग मशीन (सीएमएम), चिप फैब्रिकेशन संयंत्र, सिम्युलेशन संयंत्र आदि शामिल होंगे। 

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By Sunil Negi