संवाद सहयोगी, रुड़की: इंडियन मेडिकल एसोसिएशन रुड़की ने उत्तराखंड सरकार से क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट संशोधन की मांग करते हुए 50 बेड वाले अस्पतालों को इससे मुक्त रखने का अनुरोध किया है। आइएमए ने कहा कि हरियाणा ने भी इस एक्ट में संशोधन कराकर छोटे अस्पतालों को छूट दे दी है। यदि अस्पतालों को यह छूट नहीं मिल पाती है तो उन्हें अपने अस्पताल बंद करने पड़ेंगे।

शहर के एक होटल में शनिवार को आइएमए के पदाधिकारियों ने पत्रकार वार्ता की। संगठन सचिव डॉ. जोगराज ने कहा कि क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में यदि संशोधन नहीं होता है तो छोटे अस्पताल सारे बंद हो जाएंगे। इस एक्ट में छूट की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के सलाहकार के साथ चार सितंबर को बैठक हुई थी। इसके बाद सात सितंबर को मुख्यमंत्री के साथ बैठक होनी थी लेकिन हो नहीं सकी। न ही मुख्यमंत्री की ओर से कोई आश्वासन ही उन्हें दिया गया। सीई एक्ट के अनुसार यदि अस्पताल को तैयार किया जाता है तो इलाज इतना महंगा हो जाएगा कि आम आदमी के लिए उपचार करा पाना आसान नहीं होगा। सरकार को चाहिए कि वह 50 बेड तक के अस्पतालों को छूट दें। इस मौके पर डॉ. संजय गर्ग, डॉ. अशंक ऐरन, डॉ. सुधीर चौधरी, डॉ. अनंत गुप्ता, डॉ. रामसुभग सैनी, डॉ. सुशील नागर, डॉ. लुंबा, डॉ. सुरेंद्र कौशिक, डॉ. शमीम अहमद, डॉ. शैलेष पंवार आदि मौजूद रहे।

Posted By: Jagran