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आईआईटी रुड़की ने बनाया थ्रीडी-मिडास स्मार्ट बैंडेज, शरीर की ऊर्जा से भरेगा घाव

Published: Fri, 11 Sep 2026 09:38 PM (IST)

आईआईटी रुड़की और आइएनएसटी मोहाली ने मिलकर एक स्मार्ट, स्व-संचालित इलेक्ट्रॉनिक बैंडेज 'थ्रीडी-मिडास' विकसित किया है।

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HighLights

  1. आईआईटी रुड़की ने थ्रीडी-मिडास स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक बैंडेज विकसित किया।

  2. यह बैंडेज शारीरिक गतिविधियों से ऊर्जा प्राप्त कर घाव भरता है।

  3. प्रयोगशाला और पशु अध्ययनों में तेजी से घाव भरने की पुष्टि।

जागरण संवाददाता, रुड़की। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) रुड़की के शोधकर्ताओं ने ऐसा स्मार्ट, स्व-संचालित इलेक्ट्रानिक बैंडेज विकसित किया है, जो शारीरिक गतिविधियों से उत्पन्न विद्युत संकेतों के माध्यम से घाव भरने में सहायता कर सकता है।

इसके लिए बैटरी, तार या किसी बाहरी ऊर्जा स्रोत की आवश्यकता नहीं होती। इस थ्रीडी-मिडास नाम की तकनीक को इंस्टीट्यूट आफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलाजी (आइएनएसटी) मोहाली के सहयोग से विकसित किया गया। यह अध्ययन पीयर-रिव्यूड जर्नल 'नैनो एनर्जी' में प्रकाशित हुआ है।

आइआइटी रुड़की के डिपार्टमेंट आफ पालिमर एंड प्रोसेस इंजीनियरिंग, सेंटर फार सस्टेनेबल एनर्जी एवं शोध के प्रधान अन्वेषक प्रो. कौशिक पारिदा बताते हैं कि वे मौजूदा विद्युत-आधारित घाव भरने वाली कई प्रणालियों की एक मूलभूत सीमा को दूर करना चाहते थे।

इसमें बाहरी ऊर्जा स्रोत की आवश्यकता होती है। थ्रीडी-मिडास के साथ शरीरिक गतिविधियां स्वयं विद्युत उत्तेजना पैदा करने के लिए जरूरी यांत्रिक ऊर्जा देती हैं।

साथ ही यह ड्रेसिंग लचीली, वायु-संचार योग्य है और घाव से निकलने वाले द्रव के प्रबंधन में सक्षम है। यह शोध भविष्य में अधिक सुविधाजनक और स्व-संचालित घाव देखभाल तकनीकों के विकास में सहायक हो सकता है।

बताया कि प्रयोगशाला परीक्षणों में थ्रीडी-मिडास ने नियंत्रण परिस्थितियों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक कोशिका प्रसार और 2.5 गुना अधिक कोशिका प्रवासन प्रदर्शित किया।

पशु अध्ययनों में थ्रीडी-मिडास ड्रेसिंग से उपचारित घाव 13 से 15 दिन के भीतर 90 से 95 प्रतिशत भर गए। साथ ही, नई रक्त वाहिकाओं के निर्माण में वृद्धि हुई।

हिस्टोलाजिकल विश्लेषण में उपचारित घावों में ऊतक संरचना सुधार और कोलेजन के अधिक जमाव का भी पता चला। शोध दल में विशु वर्मा, रोमि गर्ग, सायंती मल्लिक व अनीश अली और आइएनएसटी मोहाली की केमिकल बायोलाजी यूनिट से कनिका, जट्टिन कुमार व रेहान खान शामिल रहे।

बैंडेज को ऊर्जा प्रदान करने में सहायक शारीरिक गतिविधियां

प्रो. पारिदा ने बताया कि शारीरिक गतिविधियां स्वयं बैंडेज को ऊर्जा प्रदान करने में सहायता कर सकती हैं। घाव भरना एक जटिल प्रक्रिया है और त्वचा के क्षतिग्रस्त होने पर ऊतक की मरम्मत के दौरान कोशिकाओं को दिशा देने वाले प्राकृतिक विद्युत संकेत बाधित हो सकते हैं।

थ्रीडी-मिडास को घाव के स्थान पर विद्युत उत्तेजना प्रदान करने के साथ-साथ एक लचीली, वायु-संचार योग्य संरचना उपलब्ध कराने के लिए डिजाइन किया गया है।

शोध अभिनव होने के साथ संभावित रूप से महत्वपूर्ण भी

आइआइटी रुड़की के निदेशक प्रो. केके पंत ने कहा कि अनुसंधान का वास्तविक मूल्य समाज से जुड़े महत्वपूर्ण चुनौतियों के समाधान में योगदान देने की इसकी क्षमता में निहित है।

शारीरिक गतिविधियों का उपयोग करके घाव देखभाल की तकनीक को ऊर्जा प्रदान करने का विचार अभिनव होने के साथ-साथ संभावित रूप से महत्वपूर्ण भी है। विशेषकर ऐसी परिस्थितियों में, जहां सरल, लचीले और स्व-संचालित समाधान लाभकारी हो सकते हैं।