जागरण संवाददाता, हरिद्वार: Haridwar Kumbh Mela 2021 सोमवती अमावस्या पर होने वाले कुंभ के पहले शाही स्नान के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। हरकी पैड़ी पर ब्रह्म कुंड को अखाड़ों के लिए आरक्षित रखा गया है। इस दौरान आम श्रद्धालु हरकी की पैड़ी पर प्रवेश नहीं कर सकेंगे। उन्हें अन्य घाटों पर स्नान करना होगा। शाही स्नान सुबह साढ़े आठ बजे से शुरू होकर शाम साढ़े पांच बजे तक चलेगा। सभी तेरह अखाड़ों के लिए अलग-अलग समय निर्धारित किया गया है।

कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस बार कुंभ औपचारिक तौर पर एक अप्रैल से आरंभ हुआ। पहले शाही स्नान में सभी 13 अखाड़े भाग लेंगे। इससे पहले परंपरा के अनुसार महाशिवरात्रि पर्व पर सात संन्यासी अखाड़ों ने ही स्नान किया था। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद पहले ही अखाड़ों का स्नान क्रम तय कर चुका है। इसके अनुसार सोमवार को सर्वप्रथम श्रीपंचायती अखाड़ा श्रीनिरंजनी स्नान करेगा। उसके साथ आनंद अखाड़ा रहेगा। इसके बाद श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े का क्रम तय किया गया है। जूना के साथ अग्नि, आह्वान और किन्नर अखाड़ा स्नान करेंगे। अगली बारी महानिर्वाणी है, उसके साथ अटल अखाड़ा भी स्नान करेगा। फिर दिंगबर अणि, निर्वाणी अणि और निर्मोही अणि व अगले क्रम में बड़ा व नया उदासीन अखाड़ा रहेगा। अंत में निर्मल अखाड़े के साथ ही शाही स्नान संपन्न हो जाएगा। 

पुलिस महानिरीक्षक (कुंभ मेला) संजय गुंज्याल ने बताया कि स्नान के लिए प्रत्येक अखाड़े को आधा घंटे का समय तय किया गया है। अखाड़ों का अंतिम स्नान शाम साढ़े पांच बजे तक चलेगा। इसके बाद गंगा आरती की जाएगी। गुंज्याल ने बताया कि हरकी पैड़ी तक पहुंचने के लिए अखाड़ों का मार्ग भी तय कर दिया गया है।

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100 कोविड जांच केंद्र 

कोरोना के मद्देनजर कुंभ में व्यापक व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं के लिए कोविड जांच की आरटीपीसीआर निगेटिव रिपोर्ट के साथ ही कुंभ एप पर पंजीकरण कराना अनिवार्य है। पुलिस महानिरीक्षक ने बताया कि कोविड गाइड लाइन के अनुसार ही श्रद्धालुओं का स्नान की अनुमति दी जाएगी। इसके लिए जिले की सीमाओं पर स्थित चेक पोस्ट पर जांच की जा रही है।  रिपोर्ट लेकर न आने वाले श्रद्धालुओं को सीमा से ही लौटाया जा रहा है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग ने 100 स्थानों पर जांच केंद्र स्थापित किए हैं। यहां कोविड-19 की रैपिड (एंटीजन) जांच के साथ-साथ आरटीपीसीआर जांच भी की जा रही है। इसके अलावा तीन-तीन चिकित्सकों की पांच क्यूआरटी (क्विक रेस्पांस टीम) का गठन किया गया है।

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