जागरण संवाददाता, हरिद्वार: गुरुकुल विद्यालय विभाग में 116 साल पुरानी विद्याविनोद एवं विद्याधिकारी को भारतीय शिक्षा बोर्ड मंडल (कोबसे) से मान्यता मिलने पर खुशी जताई। इससे अब ब्रह्मचारियों को विद्याधिकारी समकक्ष हाईस्कूल एवं विद्याविनोद समकक्ष इंटरमीडिएट की मान्यता के लिए अलग-अलग बोर्डों से परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी। इस खुशी में प्राध्यापकों, ब्रह्मचारियों ने मिलकर विद्यालय परिसर में यज्ञ किया।

विद्यालय के मुख्य अधिष्ठाता डॉ. दीनानाथ शर्मा ने कहा कि गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय को भारतीय शिक्षा बोर्ड मंडल (कोबसे) से सदस्यता मिलना गौरव की बात है। पहले बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा इत्यादि बोर्डों में इन दोनों उपाधियों को करने के बाद ब्रह्मचारियों को कठिनाई का सामना करना पड़ता था। कोबसे से मान्यता मिलने के बाद ब्रह्मचारियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए समस्या नहीं होगी। विद्यालय विभाग के प्रधानाचार्य डॉ. बिजेन्द्र शास्त्री ने कहा कोबसे से मान्यता होने के बाद ब्रह्मचारियों में खुशी है। डॉ. योगेश शास्त्री ने वैदिक मंत्रों के साथ गुरुकुल कुलमाता से प्रार्थना की।

विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. दिनेश भट्ट ने बताया कि गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय को वैसे तो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से मान्यता प्राप्त है। विश्वविद्यालय गुरुकुल विद्यालय विभाग के विद्याधिकारी एवं विद्याविनोद की परीक्षा कराता है। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय एक बोर्ड के समतुल्य हो गया है। कोबसे से मान्यता मिलने के बाद अब इन उपाधियों की मान्यता भारतवर्ष के प्रत्येक बोर्ड में मान्य होगी। यज्ञ आदि कार्यक्रम में जितेन्द्र वर्मा, अशोक कुमार आर्य, अश्वनी कुमार, वेदपाल ¨सह, डा बृजेश कुमार ¨सह आदि उपस्थित रहे।

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