जागरण संवाददाता, रुड़की: मौका-ए-वारदात से फिगर प्रिट, जूतों के निशान, खून का सैंपल, समेत अनेक फोरेंसिक नमूने लेने के लिए अब थानों में ही फोरेंसिक एक्सपर्ट को तैयार किया जा रहा है। रविवार को इसकी शुरूआत कोतवाली सिविललाइंस से हुई। जिसमें पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण देकर बताया गया कि किस तरह से घटनास्थल से साक्ष्य जुटाकर फोरेंसिक लैब को भेजा जा सकता है।

अभी तक किसी भी घटना में एसएसपी कार्यालय से ही फोरेंसिक टीम मौके पर भेजी जाती थी। कई बार टीम के मौके पर आने से पहले ही तमाम तरह के साक्ष्य नष्ट होने की आशंका बनी रहती है। जिसकी वजह से पुलिस को वारदात की कड़ियां जोड़ने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। जिसे देखते हुए एसएसपी डी.सैंथिल अवदूई कृष्ण राज एस ने प्रत्येक थाने के दो-दो कांस्टेबल को फोरेंसिक एक्सपर्ट बनाने के निर्देश दिए। जिसके चलते सिविललाइंस कोतवाली में एक प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। इस दौरान फोरेंसिक एक्टपर्ट अक्षय कुमार और हरीश कांडपाल ने बताया कि किस तरह से पुलिसकर्मी घटनास्थल से कैसे साक्ष्य उठाए।

एसएसपी ने बताया कि आने वाले समय में इन कांस्टेबल को और ज्यादा प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिससे की पुलिस को फोरेंसिक आधार पर भी मामलों को सुलझाने में सफलता मिल सके।

Posted By: Jagran

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