जागरण संवाददाता, हरिद्वार: श्री भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय की प्रबंध समिति को लेकर फर्जीवाड़े के मामले में अब नया मोड़ आ गया है। मुकदमे में नामजद कराए गए उत्तराखंड संस्कृत विवि के शिक्षक डा. अरविद नारायण मिश्र ने पुलिस और रजिस्ट्रार कार्यालय में हलफनामा देकर दावा किया है कि वह उत्तराखंड संस्कृत विवि की ओर से आदर्श योजना के तहत केवल नामित सदस्य रहे हैं, चिट्स फंड पंजीकरण की उन्हें कोई जानकारी ही नहीं है।

स्वामी रुपेंद्र प्रकाश की ओर से साल 2019 में डा. महावीर अग्रवाल, डा. भोला झा, शैलेश कुमार, अजय चोपड़ा, अनिल मलिक, डा. अरविद नारायण मिश्र आदि को नामजद करते हुए ज्वालापुर कोतवाली में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया गया था। मामले की जांच कर रहे शहर कोतवाली के एसएसआइ नंद किशोर ग्वाड़ी ने पिछले दिनों प्राचार्य निरंजन मिश्र को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इस मामले में डा. अरविद नारायण मिश्र ने पुलिस व रजिस्ट्रार कार्यालय में शपथ पत्र देने के बाद मीडिया के माध्यम से अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि उन्हें आदर्श योजना के तहत विवि की ओर से बतौर विद्वान सिर्फ नामित सदस्य बनाया गया था। हर बैठक में भाग लेने पर उन्हें तीन हजार रुपये मानदेय देकर हस्ताक्षर कराए जाते थे। इसके लिए महाविद्यालय के किसी वित्तीय लेन-देन से उनका कोई मतलब नहीं है। आरोप लगाया कि उन्हें चिट एंड फंड रजिस्ट्रार कार्यालय में सदस्य के रूप में दर्शाकर महाविद्यालय की प्रबंध समिति का जो पंजीकरण कराया गया है, इसकी उन्हें जानकारी तक नहीं है।

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रुपेंद्र प्रकाश के आरोपों को मिला बल

हरिद्वार: डा. अरविद नारायण मिश्र के दावे से रुपेंद्र प्रकाश के आरोपों को बल मिला है। उन्होंने बाकायदा शपथ पत्र देकर यह दावा किया है कि आरोपितों ने सदस्य के रूप में गलत तरीके से उनका पंजीकरण कराया है, जिसकी उन्हें जानकारी नहीं है। इतना ही नहीं, अरविद नारायण मिश्र ने मानहानि का मुकदमा दर्ज कराने की भी चेतावनी दी है। शपथ पत्र पर अरविद नारायण मिश्र के किए गए दावे को पुलिस अपनी जांच में शामिल करेगी, जिससे नामजद अन्य आरोपितों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

Edited By: Jagran