जागरण संवाददाता, हरिद्वार: उत्तराखंड में मेडिकल कॉलेज न होने की स्थिति में प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग के सेवारत चिकित्सकों को वर्ष 2004 से 2007 तक उत्तर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में पीजी डिप्लोमा के लिए चयनित चिकित्सा अधिकारियों का चयन कर सीटें आवंटित की गई थी। उत्तर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में आवंटित पीजी सीटों का भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, उत्तराखंड राज्य आयुर्विज्ञान परिषद से डिग्री की मान्यता न होने के मामले में सरकार की नीतियों के विरोध में जिले के सरकारी अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने नाराजगी जताई। सोमवार को इस दायरे में आने वाले चिकित्सकों ने सामान्य कामकाज तो किया, लेकिन विशेषज्ञता चिकित्सा संबंधी कार्य का बहिष्कार किया। इससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

सोमवार को प्रदेश के 113 डॉक्टरों की सूची में शामिल जिले के मेला अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. राजेश गुप्ता ने अधीक्षक के पद का दायित्व तो निभाया, लेकिन अल्ट्रासाउंड और एक्सरे की रिपोर्टिंग नहीं की। वहीं महिला अस्पताल के बालरोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप निगम ने पहले से भर्ती मासूमों के अलावा इमरजेंसी के मरीजों का इलाज किया। अस्पताल में नये बच्चे भर्ती नहीं किए गए। जिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शशिकांत, डॉ. चंदन कुमार मिश्रा, डॉ. राजकुमार ने भी विशेषज्ञ इलाज से किनारा किया। सीएमओ डॉ. एचडी शाक्य ने बताया कि मंगलवार को देहरादून में निदेशालय में बैठक है। जिसमें इस पर चर्चा की जाएगी।

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परेशान मरीज आए दिन कुछ न कुछ दिक्कत रहती है। आज अल्ट्रासाउंड करने आई थी। अस्पताल में कभी मशीन खराब, तो कभी डॉक्टर छुट्टी पर। अब डॉक्टर हड़ताल पर हैं, ऐसे में इस अस्पताल का क्या फायदा है।

- रहीमा, ज्वालापुर

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अल्ट्रासाउंड कराने आए थे, लेकिन नहीं हुआ। इससे काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। अब अधिक शुल्क देकर निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर पर जाना पड़ेगा।

- सुभाष, पथरी

Posted By: Jagran