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रुड़की, जेएनएन। बसपा-सपा के गठबंधन के बाद उत्तराखंड में बसपा सुप्रीमो मायावती की यह पहली चुनावी सभा थी। बहुत साल बाद भले सपा-बसपा नेताओं में एका दिखी हो, लेकिन पांडाल में नारों और झंडे बैनरों में फर्क दिखाई दिया।

चुनावी सभा के दौरान मंच से पहले बसपा के समर्थन में नारे लगाए गए तो पूरा पंडाल गूंज उठा। इसके बाद बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष के पक्ष में नारे लगाए जाते थे तो कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ता नजर आया। काफी देर तक नारों से पंडाल गूंजता रहा। इसके बाद समाजवादी पार्टी के नारे लगे तो उतना उत्साह दिखाई नहीं दिया। यहां तक कि अखिलेश यादव जिंदाबाद के नारे के दौरान भी कंजूसी बरती गई। इसको लेकर उत्साह दिखाई नहीं दिया लेकिन बसपा का नाम आते ही कार्यकर्ता झूम उठते थे। पंडाल में सपा के झंडे बेहद कम संख्या में दिखाई दिए। इतना ही नहीं महागठबंधन में राष्ट्रीय लोकदल भी शामिल है। रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत सिंह की आदमकद फोटो तो यहां पर लगी हुई थी, लेकिन बसपा सुप्रीमो ने एक बार भी मंच से रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष का नाम तक नहीं लिया। महागठबंधन नेताओं के लिए एक दूसरा मंच भी बनाया गया।

बसपा ने बनाया आलीशान मंच

बसपा की रैली को लेकर स्थल पर पिछले एक सप्ताह से काम किया जा रहा था। रात दिन जेसीबी लगाकर मंच को समतल किया गया। इतना ही नहीं रैली के दौरान वाटरप्रूफ टैंट भी लगाया गया। इसके अलावा मंच पर एसी लगाए गए। मंच पर एक सोफा बसपा सुप्रीमो के लिए था। उसके समीप एक कुर्सी डालकर आकाश आनंद को बैठाया गया। शेष नेता सबसे पीछे की पंक्ति में बिछाई गई कुर्सियों पर बैठे।

जब मायावती ने डांटा पदाधिकारियों को 

जिस समय बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती मंच पर संबोधन करने के बाद हटने लगी तो माइक के पास बनी चौकी से उतरते समय उनका पैर लड़खड़ा गया। वह किसी तरह से संभली। इसके बाद उन्होंने पदाधिकारियों और मंच बनाने वालों की जमकर क्लास लगाई।

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Posted By: Sunil Negi

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