संवाद सूत्र, कलियर: मेहंदी डोरी की रस्म अदायगी के साथ ही दरगाह के सालाना उर्स का आगाज हो चुका है। देश के कोने कोने से आए सूफी संतों ने यहां आकर डेरा जमा लिया है। 27 नवंबर तक कलियर में रुहानियत का दरिया बहेगा। मेला क्षेत्र के हर खेमे में इबादतों का दौर जारी रहेगा।

दरगाह उर्स के सत्रह दिन अपने आप में खास मायने रखते हैं। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक माह रबि उल अव्वल का बड़ा महत्व है। इन दिनों में दरगाह का उर्स मनाया जाता है। जिसमें विभिन्न रस्म होती है। उर्स में साबरी दीवाने पहुंचते हैं। दरगाह 17 दिनों तक सूफियाना रंग में रंगी नजर आती है। महफिले-ए-शमा भी होती है। इसके अलावा दूर-दूर से जायरीन जियारत के लिए पहुंचते हैं। दरगाह खास खादिम मोहज्जम अब्दुल सलाम बताते है कि इस्लाम में साल के बारह महीनों में रबि उल अव्वल का विशेष महत्व है।

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दरगाह में उमड़ी जायरीनों की भीड़

कलियर: दीपावली के तुरन्त बाद सालाना उर्स शुरू होने के साथ ही दरगाह में जायरीनों की भीड़ उमड़ना शुरू हो गई। शुक्रवार को उर्स की पहले मेहंदी डोरी की रस्म अदा की गई। मेला क्षेत्र के गेस्ट हाउस फुल हो गए। इसके अलावा होटलों में भी कमरा नहीं मिल पाया। माना जा रहा है कि सोमवार को ही दरगाह से कुछ भीड़ कम होगी। इसके बाद यहां पर बाहर से जायरीनों की भीड़ बढ़ना शुरू हो जाएगी।

Posted By: Jagran