हरिद्वार, अनूप कुमार। हरिद्वार में गंगा को स्वच्छ एवं निर्मल बनाए रखने के लिए गंगा किनारे खुले में शवदाह पर रोक लगा दी गई है। नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) की राज्य इकाई राज्य परियोजना प्रबंधन ग्रुप (एसपीएमजी) ने चंडीघाट में नमामि गंगे परियोजना के तहत 11721 वर्ग मीटर क्षेत्र में बने नए शवदाह गृह 'मोक्षधाम' में इस नियम को सख्ती से लागू कर दिया है। नियमों का उल्लंघन होने पर संचालक संस्था से प्रति शवदाह पांच हजार रुपये जुर्माना वसूला जाएगा।

मोक्षधाम के संचालन को पिछले दिनों कार्यक्रम निदेशक एसपीएमजी उदयराज की ओर से टेंडर नोटिस जारी किया गया। इसमें मोक्षधाम के अनुरक्षण और प्रबंधन के लिए गंगा की निर्मलता व शुद्धता के लिए इस नियम को अनिवार्य बनाया गया है। एसपीएमजी ने स्पष्ट किया है कि चंडीघाट क्षेत्र में किया जाने वाला दाह संस्कार मोक्षधाम में ही होगा। यहां गंगा के किनारे खुले में दाह संस्कार किए जाने की कोई अनुमति नहीं है।

खुले में दाह संस्कार होने पर संचालक संस्था से पांच हजार रुपये जुर्माना वसूला जाएगा। यही नहीं, गंगा शुद्धता को मोक्षधाम परिसर में होने वाले दाह संस्कार के दौरान इस्तेमाल होने वाले फूल, माला, चादर, कपड़े, बांस आदि को भी गंगा में प्रवाहित किया जाना प्रतिबंधित है।

इसके लिए एसपीएमजी ने मोक्षधाम परिसर में अलग से व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही मांस-मदिरा, तंबाकू-गुटखा और प्लास्टिक-पॉलीथिन के उपयोग को भी पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया है। ताकि गंगा में किसी भी तरह प्लास्टिक-पॉलीथिन या अन्य कूड़ा न जाने पाए।

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मोक्षधाम में यह है सुविधा

चंडीघाट मोक्षधाम परिसर में एक साथ 16 शवों का दाह संस्कार करने की व्यवस्था है। परिसर के अंदर ही लकड़ी गोदाम, स्नान घाट, ग्रेनाइट का विश्राम स्थल, प्रार्थना स्थल, लॉकर, वाहन पार्किंग, पेयजल, धार्मिक संस्कारों के लिए जलधारा प्रवाह और शौचालय उपलब्ध है।

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Posted By: Sunil Negi

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