जागरण संवाददाता, हरिद्वार। Basant Panchami 2021 मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या के बाद वसंत पंचमी स्नान को लेकर श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। कोरोना वायरस संक्रमण की आशंकाओं के बीच श्रद्धालु कोविड गाइडलाइन का पालन करते हुए सुबह से ही हल्की ठंड के बीच आस्था की डुबकी लगातेे हुए दिखे। 

सभी घाट गंगा मैया के जयकारों से गुंजायमान रहे । श्रद्धालु मैया से सुख-शांति और समृद्धि की कामना कर रहे थे। कोरोना संक्रमण को लेकर केंद्र सरकार की गाइड लाइन के अनुसार राज्य सरकार के निर्देशों के अनुपालन में बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं की रैपिड एंटीजन जांच कराई गई। हालांकि सभी घाटों पर श्रद्धालुओं की संख्या कम ही रही।

इस दौरान गंगा घाटों पर चाक चौबंद सुरक्षा रही। डेढ़ हजार से अधिक पुलिसकर्मियों व अद्र्धसैनिक बलों के जवानों ने स्नान पर्व पर डयूटी दी। कुंभ मेला आइजी संजय गुंज्याल, मेला एसएसपी जन्मेजय प्रभाकर खंडूरी, जिलाधिकारी सी रविशंकर, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सेंथिल अवूदई कृष्णराज एस सहित आला अफसरों ने गंगा घाटों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। स्नान पर्व पर सुरक्षा की दृष्टि से मेला क्षेत्र को नौ जोन व 25 सेक्टरों में बांटा गया। हर जोन में अपर पुलिस अधीक्षक व सेक्टरों में पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी बतौर प्रभारी नियुक्त रहे।

 

स्नान पर्व पर नागरिक पुलिस के कुल 1635 अधिकारी कर्मचारियों की डयूटी लगाई गई थी। बीएसएफ की तीन कम्पनी, सीआइएसएफ की दो कंपनी, सीआरपीएफ की तीन कंपनी, आइटीबीपी की दो कंपनी व एसएसबी की दो कंपनियों ने भी पुलिस के साथ मिलकर स्नान पर्व पर सुरक्षा घेरे को मजबूत किया। इनके अलावा उत्तराखंड पीएसी की पांच कंपनी व दो प्लाटून, एसडीआरएफ की दो टीमों के अलावा पहली बार एनएसजी की एक टीम भी हरकी पैड़ी पर मुस्तैद रही। 

एटीएस (आतंकवाद निरोधक दस्ता) की दो टीम, यातायात पुलिस के 153 अधिकारी-कर्मचारी और अभिसूचना इकाई के 47 अधिकारी-कर्मचारी भी सुरक्षा के मद्देनजर लगाए गए। दृष्टि बनाए रखने के लिए मेला पुलिस के मैपिंग किए गए।  1150 निजी व संस्थागत कैमरों के साथ-साथ 96 पुलिस कैमरों का प्रयोग भी किया गया। इनके अलावा आतंकवादी घटनाओं के दृष्टिगत बम निरोधक दस्ते की सात टीमें और घुड़सवार पुलिस की टीम नौ स्थानों पर तैनात रही। मेले के दौरान अग्निकांड से सुरक्षा के लिये अग्निशमन पुलिस की 15 टीमें हरिद्वार में और पांच टीमें ऋषिकेश क्षेत्र में संवेदनशील स्थानों पर समस्त अग्निशामक उपकरणों/वाहनों सहित 24 घंटे नियुक्त रही। 

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