जागरण संवाददाता, रुड़की: केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआइ) रुड़की के वैज्ञानिकों ने गुरुवार को विश्व मृदा दिवस खंजरपुर स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में विद्यार्थियों को मृदा संरक्षण को लेकर जागरूक किया। साथ ही छात्रों को स्वच्छ भारत के निर्माण का संकल्प भी दिलाया गया।

सीबीआरआइ के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक और कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. अतुल अग्रवाल ने विद्यार्थियों को जिज्ञासा-मिट्टी का मोल विषय पर व्याख्यान दिया। विद्यार्थियों को समझाया कि तेज हवा या पानी से कटाव, मिट्टी के पोषक तत्वों को पुन: स्थापित किए बिना लगातार खेती, वृक्षों के अत्यधिक कटाव से मिट्टी की पकड़ कमजोर होने, बढ़ते प्रदूषण जैसे अनेक कारणों से मिट्टी की ऊपर की सबसे उपजाऊ परत खत्म या दूषित हो जाती है। यह शीर्ष मिट्टी उन पोषक तत्वों और सूक्ष्म जीवों के विकास के लिए आवश्यक है, जो पौधे के विकास और चमक के लिए आवश्यक होते हैं। इससे मिट्टी की उर्वरता में कमी उत्पन्न होती हैं। यह किसानों के लिए ही नहीं, बल्कि हम सबके लिए एक गंभीर समस्या है। यदि मिट्टी का क्षरण होता है तो भोजन बनाने वाली फसलें अच्छी तरह से विकसित नहीं होंगी। कटाव से जमीन में बड़े सिकहोल भी हो जाते हैं। जो इमारतों को कमजोर कर सकते हैं और उनके ढहने का भी कारण बन सकते हैं। ऐसे में मिट्टी के कटान को रोकना और उसको दूषित होने से बचाना आवश्यक है। डॉ. अग्रवाल ने विद्यार्थियों के साथ मृदा संरक्षण के कुछ उपायों जैसे-पौधरोपण कर पेड़ों की जड़ों से मिट्टी को मजबूती देना, प्लास्टिक का निषेध, औद्योगिक अथवा रासायनिक कचरे से होने वाले मिट्टी के प्रदूषण से बचाव, हरित खाद से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना, रासायनिक उर्वरों का सीमित प्रयोग, फसल के चक्रीकरण से मिट्टी के प्राकृतिक पोषक तत्वों का संरक्षण, पहाड़ों पर टेरेस फार्मिंग आदि विषयों पर भी चर्चा की। कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य रामदास सिंह, योगेंद्र सिंह, वसुधा बर्थवाल, पूनम शर्मा, केला देवी आदि मौजूद रहे।

Posted By: Jagran

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