जागरण संवाददात, हरिद्वार। कोरोना काल में काल का ग्रास बने लावारिस व्यक्तियों को आखिरकार गंगा की शरण मिल गई। देवोत्थान सेवा समिति दिल्ली की ओर से शनिवार दोपहर लावारिसों की अस्थियों को कनखल सती घाट पर सौ किलो दूध की धारा के साथ विधि-विधान पूर्वक गंगा में प्रवाहित किया गया। संस्था की ओर से दिल्ली एनसीआर समेत दूसरे श्मशान घाटों से एकत्र की गई 9216 व्यक्तियों की अस्थियों को हरिद्वार लाया गया था।

श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के महामंडलेश्वर स्वामी रूपेंद्र प्रकाश ने कहा कि समिति का यह कार्य अत्यंत पुण्यदायी है। इस कार्य में समिति का हरसंभव सहयोग किया जाएगा। संस्था के महामंत्री विजय शर्मा ने बताया कि समिति से जुड़े लोग वैसे तो 19 साल से लगातार इस कार्य को करते आ रहे हैं, लेकिन इस बार इन अस्थियों में ज्यादातर उन व्यक्तियों की हैं, जिनकी मौत कोरोना काल में हुई। बताया कि संस्था से 25 छात्र भी जुड़े हैं, जो अस्थियां एकत्र करने का कार्य करते हैं। वर्ष 2003 में उन्होंने इस काम की शुरुआत की थी और अब तक लगभग एक लाख 51 हजार व्यक्तियों की अस्थियां गंगा में प्रवाहित कर चुके हैं। बताया कि इस बार हरिद्वार की पुण्यदायी अभियान सेवा समिति से जुड़े व्यक्तियों ने भी अस्थि विसर्जन में संस्था की मदद की।

संस्था के अध्यक्ष सतेंद्र चौधरी ने बताया कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। पुण्यदायी अभियान सेवा सामिति के प्रांत उपाध्यक्ष डा. विशाल गर्ग ने संस्था से जुड़े व्यक्तियों को भगीरथ की संज्ञा दी। इस मौके पर योगेंद्र सिंह मान, किरणदीप कौर, रामकिशन लोहिया, शारदा प्रसाद, नमन शर्मा, आशीष कश्यप, विजय कुमार, निखिल सिंह, गोपाल शर्मा, गोपाल वर्मा, दया दत्त भारद्वाज, वीर भाई, रामनाथ लूथरा, सुमन गुप्ता, राजेश कुमार, श्रीगंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ, पंडित राजीव तुंबड़िया, उमेश कौशिक, मंत्री टीना शर्मा, दिनेश भारद्वाज, रवींद्र गोयल आदि मौजूद रहे।

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Edited By: Sunil Negi