उत्तराखंड में यमुनोत्री रोपवे का बदलेगा रास्ता, मंदिर से सिर्फ 250 मीटर दूर होगा टर्मिनल
उत्तराखंड में यमुनोत्री धाम रोपवे के अलाइनमेंट में बड़ा बदलाव किया गया है, जिससे अब कम टावरों और न्यूनतम वन भूमि की जरूरत पड़ेगी।

यमुनोत्री रोपवे का बदलेगा रास्ता।
HighLights
रोपवे के अलाइनमेंट में बदलाव, कम टावर, कम वन भूमि।
मंदिर से मात्र 250 मीटर दूर, यात्रा 15 मिनट में।
सुरक्षित रेस्क्यू, 167 करोड़ लागत, 580 यात्री प्रति घंटा।
अश्वनी त्रिपाठी, देहरादून। यमुनोत्री धाम रोपवे की राह अब पहले की अपेक्षा कम टावरों और न्यूनतम वन भूमि की जरूरत से आसान होने जा रही है। रोपवे परियोजना के अलाइनमेंट में शासन ने बड़ा बदलाव मंजूर किया है।
इसके तहत जहां पहले 16 टावर प्रस्तावित थे, वहीं अब केवल नौ टावर लगाए जाएंगे। इससे बड़ा पर्यावरणीय लाभ होगा, प्रोजक्ट के लिए अब 3.838 हेक्टेयर की जगह 74 प्रतिशत कम, महज 0.99 हेक्टेयर वन भूमि की जरूरत पड़ेगी।
अब रोपवे का मार्ग थोड़ा लंबा होगा, लेकिन जंगल पर इसका असर काफी कम पड़ेगा। जानकीचट्टी-खरसाली से यमुनोत्री पैदल मार्ग पर 5 से 6 किमी चढ़ाई पूरी करने में ढाई से तीन घंटे लगते हैं। अब रोपवे से यह सफर महज 15 मिनट में पूरा होगा। आने और जाने में कुल पांच घंटे समय की बचत होगी।
दूर होंगी आपातकाल की चुनौतियां
नए अलाइनमेंट में रोपवे की लंबाई 3.38 किमी से बढ़कर करीब 3.82 किमी होगी, जबकि वन क्षेत्र से गुजरने वाला हिस्सा 2.838 किमी के बजाय 2.35 किमी रह जाएगा। पुराने अलाइनमेंट में कुछ टावर घने और दुर्गम वन क्षेत्र में प्रस्तावित थे। ऐसे स्थानों तक आपात स्थिति में पहुंचकर यात्रियों का रेस्क्यू करना चुनौतीपूर्ण था। नए अलाइनमेंट से यह दिक्कत दूर होगी।
मंदिर तक पैदल दूरी भी घटेगी
नए अलाइनमेंट में उच्च टर्मिनल यमुनोत्री धाम से मात्र 250 मीटर दूर होगा। रोपवे से उतरने के बाद श्रद्धालुओं को मंदिर तक कम दूरी तय करनी होगी। परियोजना की लागत करीब 167 करोड़ रुपये होगी। इसमें प्रति घंटे करीब 580 यात्रियों को ले जाने की क्षमता होगी। रोपवे में मोनोकेबल डिटेचेबल गोंडोला तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
परियोजना के लिए ड्रोन सर्वे, दोनों टर्मिनलों का भूमि सर्वे, टावर सर्वे व पेग मार्किंग, जियोलाजिकल-जियोटेक्निकल जांच और मटेरियल रोपवे सर्वे पूरा हो चुका है। लोअर टर्मिनल पर फेंसिंग का काम करीब 90 प्रतिशत पूरा है। टावर नंबर दो और तीन के लिए सिविल भूमि हस्तांतरण और पेड़ कटान भी पूरा किया जा चुका है। रोपवे का संचालन करीब नौ घंटे प्रतिदिन और लगभग 175 दिन सालाना प्रस्तावित है। -आनंद बर्द्धन, मुख्य सचिव, उत्तराखंड।
