राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड राज्य निर्माण से लेकर विकास में आधी आबादी, यानी मातृशक्ति की बड़ी भूमिका है। घर परिवार से लेकर खेती-किसानी तक की जिम्मेदारी का भार महिलाओं के कंधों पर ही है। गांवों के विकास के लिए भी व्यवहारिक समझ महिलाओं में अधिक दिखाई देती है। हर दल में महिलाओं के लिए अलग प्रकोष्ठ बनाए गए हैं। मौजूदा चुनाव में भी 48 फीसद महिला मतदाता हैं। जाहिर है कि कोई भी दल इन्हें नजरंदाज करने की स्थिति में नहीं है। चुनावी भाषणों में भी महिलाओं की समस्याओं और उनके हितों को केंद्र में रखा जा रहा है।

उत्तराखंड की महिलाएं किसी से पीछे नहीं हैं, चाहे वह शिक्षा की बात हो या राजनीति की। प्रदेश में महिला साक्षरता दर 70 प्रतिशत है। वर्ष 2017 में हुए चुनावों में महिला मतदाताओं ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। चुनाव में कुल 64.72 प्रतिशत मतदान हुआ था। इसमें पुरुषों का मतदान प्रतिशत 61.11 और महिलाओं का मतदान प्रतिशत 68.72 था।

उत्तराखंड में 70 विधानसभा सीटें हैं। हर सीट का अपना-अपना गणित हैं। कहीं राजनीतिक, कहीं धार्मिक तो कहीं जातिगत आधार पर चुनावी बिसात बिछाई जा रही है। वहीं, अगर महिला व पुरुष मतदाताओं के आधार पर देखें तो प्रदेश की छह विधानसभा ऐसी हैं, जहां महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक है। गढ़वाल मंडल में केदारनाथ व रुद्रप्रयाग विधानसभा क्षेत्रों में महिला मतदाता पुरुषों की तुलना में अधिक हैं। कर्णप्रयाग, पौड़ी, कोटद्वार और चौबट्टाखाल में पुरुष व महिला मतदाताओं के बीच 1000 से भी कम का अंतर है।

कुमाऊं मंडल में धारचूला, डीडीहाट, द्वाराहाट और पिथौरागढ़ विधानसभा क्षेत्र में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक है। वहीं, कपकोट में पुरुष व महिला मतदाताओं में केवल 800 का अंतर है। जाहिर है कि इन सीटों पर जिस प्रत्याशी के पक्ष में ये महिला मतदाता खड़ी हो जाएंगी, उस प्रत्याशी का जीतना तकरीबन तय है। देखा जाए तो प्रदेश के पर्वतीय इलाकों में महिला मतदाताओं के पोलिंग बूथ तक पहुंचने की संख्या पुरुष मतदाताओं से अधिक है। यहां मतदान प्रतिशत औसत से ज्यादा ही रहता है। इसके साथ ही पर्वतीय क्षेत्र की महिलाएं अपने हक-हकूक को लेकर काफी जागरूक भी हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश में युवक मंगल दल के सापेक्ष महिला मंगल दलों की संख्या अधिक है। पर्वतीय क्षेत्रों में पुरुषों के अधिकांश काम के लिए दूसरे शहरों में जाने के कारण महिलाएं ही गृहस्थी से लेकर खेती तक के सारे कार्य निपटाती हैं। इसीलिए विधानसभा चुनाव हो या फिर लोकसभा चुनाव, पर्वतीय क्षेत्रों में महिला सशक्तीकरण व आर्थिकी को केंद्र में रखते हुए ही मुद्दे उठाए जाते हैं।

2017 में 33 सीटों पर महिलाओं का मतदान अधिक

उत्तराखंड में महिलाओं ने चुनाव में हमेशा सक्रिय भूमिका निभाई है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में 33 सीटों पर महिलाओं ने पुरुषों से अधिक मतदान किया था। बागेश्वर, रुद्रप्रयाग व द्वाराहाट में तो पुरुषों की तुलना में 9000 से अधिक महिला मतदाताओं ने मतदान किया।

प्रदेश में महिला मतदाताओं की संख्या

  • जिला महिला मतदाता
  • उत्तरकाशी - 114500
  • चमोली - 146161
  • रुद्रप्रयाग - 97378
  • टिहरी - 258237
  • देहरादून - 705658
  • हरिद्वार - 665660
  • पौड़ी - 282102
  • पिथौरागढ़ - 190736
  • बागेश्वर - 106834
  • अल्मोड़ा - 262762
  • चम्पावत - 97061
  • नैनीताल - 369777
  • यूएस नगर - 622468
  • कुल - 3919334

इन विधानसभा क्षेत्रों में पुरुषों से अधिक हैं महिला मतदाता

  • जिला पुरुष महिला
  • केदारनाथ- 43955 - 45516
  • रुद्रप्रयाग - 51389 - 51662
  • धारचूला - 43581 - 43900
  • डीडीहाट - 40600 - 42141
  • पिथौरागढ़ - 54068 - 55103
  • द्वारहाट - 45476 - 46987

महिलाओं की प्रमुख समस्याएं

  •  महंगाई
  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा
  •  स्वरोजगार

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Edited By: Sunil Negi