कौन हैं डा. अतुल कुमार श्रीवास्तव? सात साल से छात्रों करवा रहे मुफ्त भोजन, अब JEE में स्टूडेंस ने हासिल किए 99 परसेंटाइल
उत्तराखंड के राजकीय इंटर कॉलेज भगवानपुर धारकोट के प्रधानाचार्य डॉ. अतुल कुमार श्रीवास्तव को शैलेश मटियानी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

प्रधानाचार्य डा. अतुल कुमार श्रीवास्तव।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, देहरादून। सीमित संसाधनों के बीच राजकीय इंटर कालेज भगवानपुर धारकोट के विद्यार्थियों को उनके मुकाम तक पहुंचाने में मदद करने वाले डा. अतुल कुमार श्रीवास्तव इस वर्ष प्रतिष्ठित शैलेश मटियानी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
प्रधानाचार्य डा. अतुल कुमार श्रीवास्तव ने अपने छात्रों को जेईई में 99 परसेंटाइल तक पहुंचाने, राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार करने और सात वर्ष से कक्षा नौ से 12 तक के बच्चों को निश्शुल्क भोजन उपलब्ध कराने की पहल की। करीब 30 वर्ष की सेवा में शिक्षा के क्षेत्र में उनके नवाचार और नेतृत्व को यह सम्मान मिला है।
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया निवासी डा. श्रीवास्तव उत्तराखंड में करीब 30 वर्ष से विभिन्न विद्यालयों और संस्थानों में सेवाएं दे रहे हैं। होटल एनके पोर्टिको में पत्रकार वार्ता के दौरान डा. श्रीवास्तव ने बताया कि यह पुरस्कार उनके लिए सम्मान के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ाता है। इससे उन्हें भविष्य में और अधिक मेहनत व लगन से काम करने की प्रेरणा मिलेगी।
उन्होंने बताया कि विद्यालय में वर्तमान में 72 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं और इस वर्ष परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत रहा है। प्रत्येक बच्चे की क्षमता पहचानकर उसे उसी के अनुरूप आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाता है। इसी का परिणाम है कि विद्यालय के विद्यार्थियों ने जेईई में 99 परसेंटाइल तक हासिल कर प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश लिया। सीमित खेल सुविधाओं के बावजूद विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भी प्रतिभाग किया।
यह भी पढ़ें- उत्तराखंड: शैलेश मटियानी पुरस्कार के लिए चयनित 18 शिक्षकों को मिलेगा सेवा विस्तार
सात साल से निश्शुल्क भोजन
डा. श्रीवास्तव के नेतृत्व में दो अक्टूबर 2019 से विद्यालय के शिक्षकों और कर्मचारियों के सहयोग से कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों को निश्शुल्क भोजन कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकारी मध्याह्न भोजन योजना कक्षा आठ तक के विद्यार्थियों के लिए है। ऐसे में आगे की कक्षाओं के बच्चों के भोजन और रसोइयों का खर्च विद्यालय परिवार स्वयं वहन कर रहा है।
इसके अलावा स्वयंसेवी संस्थाओं और उद्यमियों के सहयोग से विद्यार्थियों को निश्शुल्क गणवेश, छात्राओं के लिए शौचालय सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। मेधावी बच्चों को 10 हजार रुपये तक नकद पुरस्कार, टैबलेट और लैपटाप देकर प्रोत्साहित किया जाता है।
कमजोर विद्यार्थियों पर भी विशेष ध्यान
पढ़ाई में कमजोर विद्यार्थियों के लिए शिक्षकों की जिम्मेदारी लाटरी के माध्यम से तय की जाती है। जिस शिक्षक के नाम जिस विद्यार्थी की पर्ची निकलती है, वह उसे अतिरिक्त समय देकर पढ़ाई में सुधार के लिए मार्गदर्शन करता है।
