जागरण संवाददाता, ऋषिकेश: ऋषिकेश में गंगा का जलस्तर गुरुवार सुबह कम होने के कारण प्रशासन ने राहत की सांस ली है। बुधवार रात जलस्तर चेतावनी रेखा से मात्र 35 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया था। जिसको देखते हुए देर रात त्रिवेणी घाट क्षेत्र में रह रहे निराश्रितों को यहां से हटा दिया गया था।

पर्वतीय क्षेत्र में बारिश के साथ चंद्रभागा नदी का जलस्तर बढऩे से बुधवार को गंगा का जलस्तर भी बढ़ गया था। यहां गंगा में चेतावनी का निशान 339.50 मीटर है। बुधवार की रात आठ बजे तक गंगा का जलस्तर 339.15 मीटर तक पहुंच गया था। यानी गंगा चेतावनी रेखा से 35 सेंटीमीटर बह रही थी। केंद्रीय जल आयोग की ओर से प्रशासन को निरंतर अपडेट दिया जाता रहा। जिस कारण बुधवार मध्य रात्रि को पुलिस और प्रशासन की टीम ने विशेष रूप से त्रिवेणी घाट क्षेत्र में रह रहे निराश्रितों को यहां से हटा दिया था। गुरुवार को ऋषिकेश तथा आसपास क्षेत्र में रुक-रुक कर बारिश हुई। मगर इसका नदियों के जलस्तर पर कोई असर नहीं पड़ा। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक सुबह नौ बजे ऋषिकेश में गंगा का जलस्तर चेतावनी रेखा से 70 सेंटीमीटर नीचे यानी 338.80 मीटर पर था। जबकि सायं पांच बजे इसमें करीब दस सेंटीमीटर की और गिरावट आई।

पेयजल शुल्क में 15 प्रतिशत वृद्धि को बताया अनुचित

ऋषिकेश : पेयजल शुल्क में प्रतिवर्ष 15 प्रतिशत की वृद्धि को लेकर उत्तराखंड जन विकास मंच ने नाराजगी जताई है।

गुरुवार को शिवाजीनगर में उत्तराखंड जन विकास मंच की बैठक में मंच संयोजक आशुतोष शर्मा ने कहा कि जल शुल्क में प्रतिवर्ष 15 प्रतिशत की वृद्धि जनता पर अनावश्यक बोझ है। जल जीवन मिशन के अंतर्गत सभी को नल से जल पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। ऐसे में सरकार को यह 15 प्रतिशत बढ़ोत्तरी वाला नियम वापस लेना चाहिए। महंत धर्मदास महाराज ने कहा कि उत्तराखंड जल प्रदेश है। ऐसे में यहां नागरिकों को सबसे कम कीमत में पेयजल मिलना चाहिए। लेकिन इसके उलट सरकार पेयजल को महंगी दरों में दे रही है। बैठक में कुंवर ङ्क्षसह, धर्मपाल ङ्क्षसह, सुनील यादव, इंदर, दिनेश कुमार, रजनीकांत, अमर, सागर तोमर, विक्रम ङ्क्षसह, मोहित, सुनील कन्नौजिया आदि उपस्थित रहे।

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Edited By: Sunil Negi