ऋषिकेश, जेएनएन। देहरादून गढ़ी कैंट निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वामी कैलाशानंद सरस्वती का निधन हो गया। मुनिकीरेती गंगा तट पर उन्हें राजकीय सम्मान के साथ जल समाधि दी गई।

देहरादून निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वामी कैलाशानंद सरस्वती का पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए ऋषिकेश मुनिकीरेती गंगा तट पर लाया गया। यहां दर्शन महाविद्यालय के समीप गंगा में उन्हें संत परंपरा के अनुसार जल समाधि दी गई। नरेंद्र नगर पुलिस लाइन से आई सलामी गारद ने स्वतंत्र संग्राम सेनानी को अंतिम विदाई दी। 

मुनिकीरेती के थाना प्रभारी निरीक्षक आरके सकलानी ने बताया कि परिजनों की इच्छानुसार उन्हें जल समाधि दी गई। मूल रूप से मुनस्यारी पिथौरागढ़ निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वामी कैलाशानंद देहरादून स्थित डाकरा, गढ़ीकैंट मे रहते थे। गढ़ी कैंट के थाना प्रभारी नदीम अतहर ने बताया कि उनके घर पर सिटी मजिस्ट्रेट अभिषेक, पुलिस उपाधीक्षक मसूरी अरविंद सिंह रावत की मौजूदगी में पुलिस लाइन से गारद ने उन्हें सलामी दी।

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मूल रूप से थे मुंस्यारी के निवासी

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का वास्तविक नाम कैलाशानंद तिवारी था। उनका जन्म मुंस्यारी पिथौरागढ़ में 29 फरवरी 1920 को हुआ था। थानाध्यक्ष गढ़ी कैंट ने बताया कि वर्ष 1960 में स्वामी कैलाशानंद डाकरा में आ गए थे। यहां उन्होंने एक आश्रम बनाया। वह अविवाहित थे। उनकी सेवा उनकी भतीजी के पति आनंद सिंह बृजवाल करते थे। पूर्व मुख्यमंत्री व वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी भी उनसे मुलाकात करने आते थे।

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Posted By: Bhanu

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