संवाद सूत्र, साहिया: जौनसार-बावर में मंदिरों में आस्था सभी की है, लेकिन कालसी ब्लाक के टिमरा गांव से कुछ ही दूर टोंस नदी के बीचों-बीच स्थित शिला में सराड़ी देवी का वास मानकर लोग पीढि़यों से पूजते आ रहे हैं। नदी के बीच सिर्फ शिला है, जहां पर न मंदिर है न मूर्ति, लेकिन आस्था जौनसार ही नहीं हिमाचल प्रदेश के व्यक्तियों की भी है। श्रद्धालु टोंस नदी किनारे खड़े होकर ही पूजा करते हैं और घर परिवार की खुशहाली की मन्नतें मांगते हैं।

टिमरा गांव के ग्रामीण हर साल 15 जून को जात्रा लेकर पूजन के लिए यहां आते हैं। टोंस नदी में यह शिला ऐसी है कि नदी का जलस्तर चाहे कितना ही क्यों न बढ़ जाए, यह डूबती नहीं है। टिमरा, आरा, किसोऊ, क्वानू, विकासनगर के बाडवाला व हिमाचल प्रदेश के पांवटा के श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। 15 जून को इस बार भंडारे का भी आयोजन है। श्रद्धालुओं का कहना है कि टोंस नदी के बीच स्थित प्राकृतिक शिला में देवी मां का वास है। श्रद्धालु भंडारी अमर सिंह नेगी, स्याणा मोहर सिंह नेगी, नारायण सिंह नेगी, कुंवर सिंह तोमर, मुन्ना सिंह चौहान, सरदार सिंह नेगी, कांशीराम नेगी, अमर सिंह तोमर, अतर सिंह नेगी, मोहर सिंह तोमर, दसू नेगी, सियाराम तोमर आदि का कहना है कि टिमरा पंचायत के ग्रामीण हर वर्ष बरसात से पहले जून माह में पूजन करते हैं, जिससे बरसात में नदी की बाढ़ से किसी का नुकसान न हो। इस जगह हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। देखा जाए तो टोंस नदी हर बरसात में विकराल रूप धारण करती है, लेकिन देवी के आर्शीवाद से किसी ग्रामीण व किसान का कोई नुकसान नहीं होता।

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