देहरादून, राज्य ब्यूरो। विश्व प्रसिद्ध कार्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व से सटे गांवों के न सिर्फ दिन बहुरेंगे, बल्कि स्थानीय निवासियों की वन्यजीव संरक्षण में सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए केंद्र सरकार ने प्रोजेक्ट टाइगर के तहत दोनों टाइगर रिजर्व से सटे 35 गांवों के लिए प्रति गांव ढाई-ढाई लाख रुपये की राशि मंजूर की है। इसके अलावा वन विभाग ने अन्य मदों में भी अतिरिक्त राशि की व्यवस्था की है। इससे इन गांवों में आजीविका विकास पर ध्यान केंद्रित करने के साथ ही वन्यजीवों को आबादी की तरफ आने से रोकने के उपाय किए जाएंगे।

प्रदेश के अन्य हिस्सों की भांति कार्बेट टाइगर रिजर्व और राजाजी टाइगर रिजर्व से लगे गांवों में भी वन्यजीवों ने ग्रामीणों की नींद उड़ाई हुई है। कब कहां हिंसक वन्यजीव जंगल की देहरी लांघ ग्रामीणों के लिए जान के खतरे का सबब बन जाएं, कहा नहीं जा सकता। साथ ही जंगली जानवरों द्वारा फसलों को क्षति भी कम नहीं है। इसे देखते हुए दोनों टाइगर रिजर्व की ओर से वार्षिक कार्ययोजना में रिजर्व से सटे गांवों को शामिल करते हुए इनके लिए भी प्रोजेक्ट टाइगर के तहत केंद्र से धन की मांग की गई। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अॅथोरिटी (एनटीसीए) ने इसे स्वीकार भी कर लिया।

प्रमुख वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक राजीव भरतरी बताते हैं कि केंद्र ने प्रोजेक्ट टाइगर के तहत दोनों टाइगर रिजर्व से लगे गांवों के लिए धनराशि जारी की है। इसमें कार्बेट के 25 और राजाजी रिजर्व के 10 गांव शामिल हैं। प्रति गांव ढाई-ढाई लाख की राशि मंजूर हुई है। इसके अलावा अन्य मदों से भी धनराशि की व्यवस्था की गई है। 

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मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक भरतरी के अनुसार इन गांवों के लिए कार्ययोजना तैयार हो रही है। इसके तहत आजीविका विकास और मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम को उपाय समेत अन्य कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष थामने के मद्देनजर इन गांवों में चयनित क्षेत्रों में सोलर पावर फैसिंग अथवा दीवारबंदी, गांवों के इर्द-गिर्द व रास्तों पर झाड़ी कटान जैसे कार्य प्रस्तावित हैं। साथ ही रोजगारपरक कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे। 

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Posted By: Sunil Negi

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