उत्तराखंड की छोटी जलविद्युत परियोजनाएं बनीं हरित ऊर्जा की सबसे बड़ी ताकत, बनाई 855 मिलियन यूनिट बिजली
उत्तराखंड में छोटी जलविद्युत परियोजनाएं हरित ऊर्जा का मुख्य आधार बन गई हैं, जिन्होंने वित्तीय वर्ष 2025-26 में गैर-पारंपरिक स्रोतों से बिजली उत्पादन में सर्वाधिक योगदान दिया है।


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अश्वनी त्रिपाठी, देहरादून। उत्तराखंड में लघु जलविद्युत परियोजनाएं अब केवल बिजली उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि राज्य की हरित ऊर्जा का सबसे मजबूत आधार बन गई हैं। गैर-पारंपरिक ऊर्जा के क्षेत्र में लघु जलविद्युत परियोजनाएं ही उत्तराखंड की रीढ़ हैं।
केंद्र सरकार की रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में फरवरी तक उत्तराखंड ने गैर-पारंपरिक स्रोतों से 855.91 मिलियन यूनिट बिजली पैदा की। इसमें सबसे बड़ा योगदान 323.95 मिलियन यूनिट के साथ लघु जलविद्युत परियोजनाओं का रहा। साफ है कि पहाड़ में आज भी पानी ही सबसे बड़ी ताकत बना हुआ है।
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए लघु जलविद्युत परियोजनाएं सबसे उपयुक्त ऊर्जा माडल हैं। इनमें बड़े बांधों की तरह विशाल जलाशय नहीं बनते, इसलिए विस्थापन और पर्यावरणीय दबाव अपेक्षाकृत कम रहता है।
साथ ही छोटी परियोजनाएं दूरस्थ गांवों तक बिजली पहुंचाने, स्थानीय युवाओं को रोजगार देने और पलायन से जूझते पहाड़ में आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा रही हैं। दिलचस्प है कि जब देश के कई राज्य सौर और पवन ऊर्जा के जरिए नई पहचान बना रहे हैं, तब उत्तराखंड की पहचान जलशक्ति से ही हो रही है।
800 मिलियन यूनिट तक कर चुके बिजली उत्पादन
उत्तराखंड में लघु जलविद्युत परियोजनाओं से सर्वाधिक 821.88 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन वर्ष 2020-21 में हुआ था। इसके बाद 2021-22 में उत्पादन घटकर 326.70 मिलियन यूनिट रह गया।
हालांकि, अगले वर्षों में यह आंकड़ा स्थिरता की ओर बढ़ा और 2022-23 में 352.07, 2023-24 में 350.62 तथा 2024-25 में 353.40 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन दर्ज किया गया। मौजूदा वित्तीय वर्ष 2025-26 में फरवरी तक 323.95 मिलियन यूनिट बिजली पैदा हो चुकी है।
उत्पादन में उतार-चढ़ाव का बड़ा कारण जलप्रवाह और मौसम पर निर्भरता है। बरसात में उत्पादन बढ़ता है, जबकि सर्दियों में जलस्तर कम होने से उत्पादन प्रभावित होता है। सिल्ट जमा होना, रखरखाव और ट्रांसमिशन नेटवर्क की सीमाएं भी चुनौती बनी रहती हैं।
लंबे समय से राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर रहीं
यूजेवीएन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एके सिंह के अनुसार, देहरादून की कुल्हाल जलविद्युत परियोजना, ढकरानी परियोजना, हरिद्वार की पथरी परियोजना, मोहम्मदपुर और निरगड्डू जैसी परियोजनाएं लंबे समय से राज्य की ऊर्जा जरूरतों को सहारा दे रही हैं। उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग की घाटियों में भी कई लघु परियोजनाएं स्थानीय स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति में अहम भूमिका निभा रही हैं।
