जागरण संवाददाता, देहरादून। टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कारपोरेशन (टीएचडीसी) का मुख्यालय भले ही उत्तराखंड में है, मगर इसके बिजली उत्पादन का 25 फीसद हिस्सा उत्तर प्रदेश को मिलता है। उत्तराखंड के हिस्से सिर्फ टिहरी व कोटेश्वर बांध की 12 फीसद बिजली (168 मेगावाट) रायल्टी के रूप में आती है। उत्तर प्रदेश पुनर्गठन एक्ट के मुताबिक विभाजन के समय जो संपत्ति जिस प्रदेश में होगी, उसका अधिकार उसी प्रदेश के पास रहेगा। लिहाजा, अपने हिस्से की 25 फीसद बिजली के लिए सुप्रीम कोर्ट के समक्ष जो वाद उत्तराखंड ने वर्ष 2012 में दाखिल किया था, उसकी प्रभावी पैरवी की जरूरत है। उत्तराखंड के आम्बड्समैन (विद्युत) सुभाष कुमार ने इस हक को प्राप्त करने के लिए मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से सुप्रीम कोर्ट में निरंतर पैरवी कराने का आग्रह किया है।

बुधवार को पत्रकारों से रूबरू आम्बड्समैन (विद्युत) सुभाष कुमार ने कहा कि वर्ष 2012 में जब वह मुख्य सचिव थे, तब उन्होंने ही 25 फीसद बिजली पर अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से तब प्रकरण में कोई पैरवी नहीं की गई और वर्ष 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के हक में एकतरफा फैसला सुना दिया था। हालांकि, उत्तराखंड ने नर्म रुख दिखाते हुए उत्तर प्रदेश को एक मौका और दिया। इसी क्रम में वर्ष 2019 में सुप्रीम कोर्ट में यह केस दोबारा शुरू कर दिया गया। आम्बड्समैन (विद्युत) ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुनर्गठन एक्ट में स्पष्ट है कि टीएचडीसी की प्रदेश व प्रदेश के बाहर की सभी परियोजनाओं का 25 फीसद लाभ उत्तराखंड को मिलेगा। अगर सरकार इस तरफ ध्यान दे तो जल्द सुप्रीम कोर्ट राज्य के हक में आदेश जारी कर सकता है।

उत्तर प्रदेश ने खर्च किए 923 करोड़, उत्तराखंड लौटाने को तैयार

आम्बड्समैन (विद्युत) सुभाष कुमार के मुताबिक नौ नवंबर 2000 को उत्तराखंड के गठन के बाद उत्तर प्रदेश ने टीएचडीसी में 923.87 करोड़ रुपये का निवेश किया है। उत्तराखंड यह धनराशि लौटाने को तैयार है। इसी के साथ उत्तराखंड के हिस्से डिविडेंड की वह धनराशि भी आ सकती है, जो शेयरधारक के रूप में उत्तर प्रदेश ने प्राप्त की। बिजली पर भी उत्तराखंड का हक 12 फीसद से बढ़कर 25 फीसद हो जाएगा। यह नियम टिहरी व कोटेश्वर बांध के अलावा अन्य परियोजनाओं के उत्पादन पर भी लागू होगा।

2012 में ही एक हजार करोड़ था ग्राफ

आम्बड्समैन (विद्युत) सुभाष कुमार के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट में वाद दाखिल करने के दौरान वर्ष 2012 में ही राज्य की हिस्सेदारी का ग्राफ एक हजार करोड़ रुपये पार कर गया था। वर्तमान में इसका आकलन किया जा रहा है, मगर यह धनराशि तब से कई गुना हो चुकी है।

टीएचडीसी की इन परियोजनाओं पर मिलेगा उत्तराखंड को हक

परियोजना, क्षमता (मेगावाट में), स्थिति

टिहरी पावर प्रोजेक्ट, 1000, संचालित

कोटेश्वर पावर प्रोजेक्ट, 400, संचालित

खुर्जा थर्मल पावर, 1320, निर्माणाधीन

टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट, 1000, निर्माणाधीन

विष्णुगाड पीपलकोटी, 444, निर्माणाधीन

गुजरात विंड प्रोजेक्ट, 113, निर्माणाधीन

झांसी पावर प्रोजेक्ट, 24, निर्माणाधीन

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Edited By: Raksha Panthri