उत्तराखंड की नई औद्योगिक नीतियां: विकास और रोजगार का नया युग, पर्वतीय क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा
उत्तराखंड सरकार की नई औद्योगिक नीतियां राज्य में निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास को बढ़ावा दे रही हैं। विशेषकर पर्वतीय ...और पढ़ें

HighLights
नई औद्योगिक नीतियां उत्तराखंड में निवेश और रोजगार बढ़ा रही हैं।
MSME नीति-2023 पर्वतीय क्षेत्रों में उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन दे रही।
'रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म' मंत्र से राज्य विकास की नई राह पर।
डिजिटल टीम, देहरादून। किसी भी राज्य का चौमुखी विकास उसकी व्यावहारिक और दूरदर्शी नीतियों पर निर्भर करता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश में निवेश बढ़ाने, रोजगार के अवसर पैदा करने और औद्योगिक माहौल को सुदृढ़ करने के लिए कई क्रांतिकारी नीतियां धरातल पर उतारी हैं। राज्य की नई औद्योगिक नीति, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, लॉजिस्टिक्स नीति, स्टार्टअप नीति और 'एमएसएमई नीति-2023' जैसी पहलों ने प्रदेश में विकास का एक नया युग शुरू किया है।
इन नीतियों का सबसे बड़ा असर पर्वतीय क्षेत्रों में दिख रहा है, जहां अब उद्योगों की 'पहाड़ चढ़ने की राह' सुगम और व्यावहारिक बन गई है।
21वीं सदी का यह दशक उत्तराखंड का: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
उत्तराखंड के विकास मॉडल और उसकी विरासत के संरक्षण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि 21वीं सदी के लिए विकसित भारत का निर्माण मुख्यतः दो स्तंभों पर टिका है— पहला अपनी विरासत पर गर्व करना और दूसरा विकास की दिशा में किए जा रहे हर संभव प्रयास को आगे बढ़ाना। आज इन दोनों स्तंभों को उत्तराखंड मजबूती दे रहा है, ऐसे में यह कहना तर्कसंगत रहेगा कि यह दशक निश्चित रूप से उत्तराखंड का दशक होगा।
'रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म' पर केंद्रित विकास मॉडल
प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने औद्योगिक नीतियों और राज्य के विजन को रेखांकित करते हुए कहा कि सरकार 'रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म' के मूल मंत्र के साथ काम कर रही है। धामी ने कहा कि उत्तराखंड में अपार संभावनाएं मौजूद हैं, जिन्हें लगातार विकसित किया जा रहा है ताकि युवाओं को अधिक से अधिक संख्या में रोजगार मिल सके। हम निवेश अनुकूल नीतियों को बढ़ावा देकर रोजगार के अवसर पैदा करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इसमें हमें निवेशकों और सभी हितधारकों का पूरा समर्थन मिल रहा है। समग्र रूप से उत्तराखंड विकास के पथ पर अग्रसर है।
एमएसएमई नीति-2023: पर्वतीय क्षेत्रों में निवेश को प्राथमिकता
उत्तराखंड सरकार द्वारा लागू की गई 'एमएसएमई नीति-2023' ने वर्ष 2015 की पुरानी नीति का स्थान लिया है। इस नीति का मुख्य केंद्र मैदानी इलाकों के साथ-साथ पर्वतीय और दुर्गम जिलों में नए उद्योगों की स्थापना को आर्थिक रूप से आकर्षक बनाना है।
- निवेश पर सब्सिडी लाभ: मैदानी क्षेत्रों की तुलना में पर्वतीय जिलों में उद्योग लगाने पर निवेशकों को अधिक सब्सिडी प्रदान की जा रही है, जिससे पहाड़ों में रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं और पलायन पर प्रभावी रोक लग रही है।
- चार श्रेणियों में वर्गीकरण: औद्योगिक संतुलन बनाए रखने के लिए प्रदेश को भौगोलिक स्थिति और दुर्गमता के आधार पर श्रेणी-ए, बी, सी और डी में विभाजित किया गया है।
- पहाड़ों में ₹4 करोड़ तक की राहत: पर्वतीय क्षेत्रों (श्रेणी-ए) में मध्यम श्रेणी के उद्योग स्थापित करने पर ₹4 करोड़ तक की भारी सब्सिडी और स्टाम्प शुल्क में 100% तक की प्रतिपूर्ति दी जा रही है।
तकनीकी नवाचार और आध्यात्मिक पहचान का संगम
एक ओर जहां उत्तराखंड अपनी समृद्ध आध्यात्मिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के लिए जाना जाता है, वहीं अब यह तकनीकी और अत्याधुनिक उद्योगों के क्षेत्र में भी नई ऊंचाइयां छू रहा है। ड्रोन निर्माण, लॉजिस्टिक्स हब, और आईटी आधारित स्टार्टअप्स के जरिए देवभूमि देश के अग्रणी औद्योगिक राज्यों की श्रेणी में अपनी पहचान मजबूत कर रही है।
