उत्तराखंड में विज्ञान और नवाचार से बदलेगी तस्वीर, देहरादून में बन रही 5वीं साइंस सिटी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विज्ञान को आम जनजीवन से जोड़ना आवश्यक है और देहरादून में देश की ...और पढ़ें

HighLights
विज्ञान को आम जनजीवन से जोड़ना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता।
देहरादून में देश की 5वीं साइंस सिटी का निर्माण तीव्र गति से जारी।
युवाओं को 'जॉब क्रिएटर' बनाने पर जोर, नई नीति लागू।
डिजिटल टीम, देहरादून। विज्ञान को केवल प्रयोगशालाओं और किताबों तक सीमित रखने के बजाय आम जनमानस के रोजमर्रा के जीवन से जोड़ना आज के दौर की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यह बात उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को देहरादून स्थित आई.आर.डी.टी. सभागार में आयोजित विशेष सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही।
उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UCOST) के तत्वावधान में आयोजित "Mainstreaming Science, Technology and Innovation for a Prosperous Uttarakhand" कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया और राज्य के तकनीकी व वैज्ञानिक विकास का खाका प्रस्तुत किया।
देश की 5वीं साइंस सिटी से जगेगी बच्चों में वैज्ञानिक जिज्ञासा
मुख्यमंत्री धामी ने घोषणा करते हुए कहा कि देहरादून में स्थापित हो रही देश की पांचवीं साइंस सिटी का निर्माण कार्य तीव्र गति से चल रहा है, जो उत्तराखंड को विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र में वैश्विक पहचान दिलाएगी। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि प्रदेशभर के दूर-दराज और पर्वतीय क्षेत्रों के स्कूली विद्यार्थियों को नियमित रूप से साइंस सिटी का भ्रमण कराया जाए। उन्होंने कहा कि इस तरह के एक्सपोजर से बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान और नवाचार की भावना जागृत होगी, जो भविष्य के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं की नई पीढ़ी तैयार करने में मील का पत्थर साबित होगी।
प्राकृतिक संसाधनों से नहीं, ज्ञान-विज्ञान से तय हो रही विश्व की प्रगति
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि आज दुनिया की प्रगति केवल प्राकृतिक संसाधनों से नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार की क्षमता से तय हो रही है। एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन और सेमीकंडक्टर जैसी अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियां अब स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, पर्यटन और विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों के आपदा प्रबंधन में परिवर्तनकारी भूमिका निभा रही हैं। राज्य सरकार ने उत्तराखंड की पहली 'विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति' लागू की है। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि 'जॉब क्रिएटर' बनाना है।
लैब्स ऑन व्हील्स और स्टेम लैब्स का हो रहा विस्तार
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राज्य में साइंस एंड इनोवेशन सेंटर, लैब्स ऑन व्हील्स, जीआईएस-आधारित डैशबोर्ड, डिजिटल लाइब्रेरी, पेटेंट इंफॉर्मेशन सेंटर और स्टेम लैब्स जैसी आधुनिक सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत-2047' के संकल्प का जिक्र करते हुए कहा कि डिजिटल इंडिया, नेशनल क्वांटम मिशन और सेमीकंडक्टर मिशन भारत को वैश्विक तकनीकी महाशक्ति बना रहे हैं, जिसमें उत्तराखंड अपनी अग्रणी भूमिका निभाएगा।
"हमारा संकल्प है कि देवभूमि उत्तराखंड को वीरभूमि और खेलभूमि के साथ-साथ 'विज्ञान और नवाचार की भूमि' के रूप में भी वैश्विक मंच पर पहचान मिले।"
— पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड
प्रतिष्ठित हस्तियों की रही गरिमामयी मौजूदगी
समारोह के दौरान विधायक मुन्ना सिंह चौहान, पद्मश्री डॉ. बी.के. संजय, सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी, यूकॉस्ट (UCOST) के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत, पंतनगर यूनिवर्सिटी के प्रो. जे.पी. जायसवाल, यूकॉस्ट के संयुक्त निदेशक डॉ. डी.पी. उनियाल सहित कई प्रमुख शिक्षाविद, वैज्ञानिक और नीति-निर्माता उपस्थित रहे।
