ग्लोबल वेलनेस कैपिटल बनेगा उत्तराखंड: धामी सरकार की 'योग नीति' से युवाओं को रोजगार और नागरिकों को मिल रहा आरोग्यता का वरदान
धामी सरकार ने 'उत्तराखंड योग नीति' लागू कर राज्य को विश्व स्तर पर योग और वेलनेस की राजधानी बनाने की ...और पढ़ें

HighLights
उत्तराखंड को वैश्विक योग और वेलनेस राजधानी बनाया जा रहा है।
धामी सरकार की योग नीति से युवाओं को रोजगार मिल रहा है।
राज्य में योग और प्राकृतिक चिकित्सा निदेशालय स्थापित किया गया।
योग को बढ़ावा देने के लिए धामी सरकार के प्रमुख कदम
देश की पहली योग नीति व योग निदेशालय की स्थापना: राज्य में योग और प्राकृतिक चिकित्सा को नियमित करने तथा गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अलग से योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा निदेशालय का गठन किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय योग हब का निर्माण: ऋषिकेश के अलावा जागेश्वर, मुक्तेश्वर, व्यास घाटी, टिहरी झील और कोलीढेक झील जैसे क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय स्तर के 5 नए योग हब 2030 तक विकसित किए जा रहे हैं।
सेंटरों के लिए बंपर सब्सिडी: पर्वतीय क्षेत्रों में योग और ध्यान केंद्र स्थापित करने पर प्रोजेक्ट लागत की 50% सब्सिडी (अधिकतम ₹20 लाख) तथा मैदानी क्षेत्रों में 25% (अधिकतम ₹10 लाख) का अनुदान दिया जा रहा है।
मिल रहा है सीधा लाभ
स्थानीय युवा और योग ट्रेनर: योग नीति के तहत 10,000 से अधिक योग प्रशिक्षकों को रोजगार और 2,500 से ज्यादा सर्टिफाइड योग इंस्ट्रक्टर तैयार किए जा रहे हैं। पर्वतीय क्षेत्रों के युवाओं के लिए 'रिवर्स पलायन' का यह एक बड़ा माध्यम बन रहा है।
महिलाएं और ग्रामीण परिवार: गांवों में 'योग ग्राम' की स्थापना और आयुष वेलनेस सेंटरों से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं आरोग्य के साथ-साथ होमस्टे और वेलनेस टूरिज्म से आजीविका कमा रही हैं।
विद्यार्थी: स्कूली और उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम में योग को शामिल किए जाने से विद्यार्थियों का शारीरिक और मानसिक तनाव दूर हो रहा है।
देश-विदेश के पर्यटक व साधक: योग पर्यटन को बढ़ावा मिलने से हर साल आने वाले लाखों विदेशी और राष्ट्रीय पर्यटक आध्यात्मिक शांति के साथ उत्तराखंड की आतिथ्य सेवा का लाभ ले रहे हैं।
