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ग्लोबल वेलनेस कैपिटल बनेगा उत्तराखंड: धामी सरकार की 'योग नीति' से युवाओं को रोजगार और नागरिकों को मिल रहा आरोग्यता का वरदान

Published: Wed, 16 Sep 2026 04:03 PM (IST)

धामी सरकार ने 'उत्तराखंड योग नीति' लागू कर राज्य को विश्व स्तर पर योग और वेलनेस की राजधानी बनाने की ...और पढ़ें

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HighLights

  1. उत्तराखंड को वैश्विक योग और वेलनेस राजधानी बनाया जा रहा है।

  2. धामी सरकार की योग नीति से युवाओं को रोजगार मिल रहा है।

  3. राज्य में योग और प्राकृतिक चिकित्सा निदेशालय स्थापित किया गया।

डिजिटल टीम, देहरादून। 'देवभूमि' उत्तराखंड को विश्व स्तर पर योग और वेलनेस की राजधानी के रूप में स्थापित करने के लिए पुष्कर सिंह धामी सरकार अभूतपूर्व कदम उठा रही है। देश की पहली समर्पित 'उत्तराखंड योग नीति' लागू कर सरकार ने योग को केवल स्वास्थ्य अभ्यास तक सीमित न रखकर इसे शिक्षा, पर्यटन, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से सीधे जोड़ दिया है।
 
ऋषिकेश और हरिद्वार से लेकर पर्वतीय दूरस्थ क्षेत्रों तक फैला यह योग इकोसिस्टम न केवल राज्य के निवासियों की सेहत सुधार रहा है, बल्कि स्थानीय युवाओं को आर्थिक स्वावलंबन भी प्रदान कर रहा है।

योग को बढ़ावा देने के लिए धामी सरकार के प्रमुख कदम

देश की पहली योग नीति व योग निदेशालय की स्थापना: राज्य में योग और प्राकृतिक चिकित्सा को नियमित करने तथा गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अलग से योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा निदेशालय का गठन किया गया है।

अंतरराष्ट्रीय योग हब का निर्माण: ऋषिकेश के अलावा जागेश्वर, मुक्तेश्वर, व्यास घाटी, टिहरी झील और कोलीढेक झील जैसे क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय स्तर के 5 नए योग हब 2030 तक विकसित किए जा रहे हैं। 

सेंटरों के लिए बंपर सब्सिडी: पर्वतीय क्षेत्रों में योग और ध्यान केंद्र स्थापित करने पर प्रोजेक्ट लागत की 50% सब्सिडी (अधिकतम ₹20 लाख) तथा मैदानी क्षेत्रों में 25% (अधिकतम ₹10 लाख) का अनुदान दिया जा रहा है। 

अनुसंधान व आयुष सेंटरों से जुड़ाव: योग और प्राकृतिक चिकित्सा में रिसर्च के लिए ₹10 लाख तक की वित्तीय सहायता और राज्य के सभी आयुष आरोग्य केंद्रों (AYUSH Wellness Centres) में योग सेवाएं अनिवार्य की गई हैं। 
ऋषिकुल को योग व आयुर्वेद का महाकेंद्र बनाना: हरिद्वार के ऐतिहासिक ऋषिकुल परिसर को आयुर्वेद, योग और भारतीय ज्ञान परंपरा के भव्य वैश्विक केंद्र के रूप में मास्टर प्लान बनाकर विकसित किया जा रहा है। 

मिल रहा है सीधा लाभ

स्थानीय युवा और योग ट्रेनर: योग नीति के तहत 10,000 से अधिक योग प्रशिक्षकों को रोजगार और 2,500 से ज्यादा सर्टिफाइड योग इंस्ट्रक्टर तैयार किए जा रहे हैं। पर्वतीय क्षेत्रों के युवाओं के लिए 'रिवर्स पलायन' का यह एक बड़ा माध्यम बन रहा है।

महिलाएं और ग्रामीण परिवार: गांवों में 'योग ग्राम' की स्थापना और आयुष वेलनेस सेंटरों से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं आरोग्य के साथ-साथ होमस्टे और वेलनेस टूरिज्म से आजीविका कमा रही हैं।
विद्यार्थी: स्कूली और उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम में योग को शामिल किए जाने से विद्यार्थियों का शारीरिक और मानसिक तनाव दूर हो रहा है।

देश-विदेश के पर्यटक व साधक: योग पर्यटन को बढ़ावा मिलने से हर साल आने वाले लाखों विदेशी और राष्ट्रीय पर्यटक आध्यात्मिक शांति के साथ उत्तराखंड की आतिथ्य सेवा का लाभ ले रहे हैं।

उत्तराखंड को वैश्विक वेलनेस हब बनाने की प्रतिबद्धता पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आयुष, योग और अध्यात्म देवभूमि उत्तराखंड की मूल आत्मा और पहचान हैं। हमारी सरकार ने योग नीति के माध्यम से उत्तराखंड को दुनिया की योग राजधानी बनाने का मजबूत रोडमैप तैयार किया है। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने की जीवनशैली है। हम राज्य में आधुनिक तकनीकों और प्राचीन ज्ञान के समन्वय से ऐसा इकोसिस्टम बना रहे हैं, जहां हमारे युवाओं को अपने ही घर में रोजगार मिले और यहां आने वाला हर श्रद्धालु आरोग्यता का अनुभव लेकर जाए।