कम होगा उत्तराखंड के बड़े शहरों का दबाव... बनेंगे नए ग्रोथ सेंटर, 98 शहरों की महायोजना तैयार
उत्तराखंड सरकार बड़े शहरों जैसे देहरादून, हल्द्वानी पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए छोटे शहरों में नए ग्रोथ सेंटर विकसित कर रही है।


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, देहरादून। प्रदेश सरकार ने देहरादून, हल्द्वानी, हरिद्वार और रुद्रपुर जैसे बड़े शहरों पर बढ़ती आबादी, यातायात, निर्माण व बुनियादी सुविधाओं के दबाव को आसपास के छोटे व अन्य शहरों में बांटने की तैयारी कर ली है।
आवास विभाग प्रदेश के 98 छोटे-बड़े शहरों की महायोजनाएं वर्ष 2041 और वर्ष 2045 की जरूरतों के हिसाब से तैयार कर रहा है। उद्देश्य आवास, रोजगार, कारोबार और नागरिक सुविधाओं को अलग-अलग शहरी केंद्रों में विकसित कर बड़े शहरों पर बढ़ते दबाव को कम करना है।
आवास सचिव डा. आर. राजेश कुमार के अनुसार, मुमंत्री के विजन के अनुरूप महायोजनाओं में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर नियोजित विकास पर जोर दिया जा रहा है। इससे शहरों का अनियोजित विस्तार रोकने के साथ भूमि उपयोग व्यवस्थित करने, यातायात, जल निकासी और आपदा प्रबंधन जैसी चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी।
योजना से देहरादून के दबाव को ऋषिकेश, डोईवाला और विकासनगर जैसे शहरों में बांटने की गुंजाइश बनेगी। इन शहरों में आवासीय विस्तार के साथ रोजगार और कारोबार की गतिविधियां विकसित होने से राजधानी की ओर रोजाना आने-जाने वाली आबादी का दबाव भी घटेगा। इसी तरह हल्द्वानी-काठगोदाम, हरिद्वार-रुड़की और ऊधमसिंह नगर के बड़े शहरी क्षेत्रों के आसपास के निकायों को मजबूत करने की दिशा में महायोजनाएं आधार तैयार करेंगी।
98 शहरों में बनेगा विकास का नया ढांचा
अमृत-एक में देहरादून, हरिद्वार, रुड़की, रुद्रपुर, काशीपुर, नैनीताल और हल्द्वानी शामिल हैं। अमृत-दो में कोटद्वार, श्रीनगर, पौड़ी, जसपुर, नगला, खटीमा, किच्छा, बाजपुर, सितारगंज, गदरपुर, रामनगर, मंगलौर, लक्सर, टनकपुर, गोपेश्वर, ऋषिकेश, डोईवाला, विकासनगर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर, उत्तरकाशी और टिहरी शामिल हैं। इसके अलावा सात क्लस्टरों में 65 नगर निकायों की महायोजनाएं भी तैयार हो रही हैं।
रोजगार के साथ सुविधाएं भी पहुंचेंगी
महायोजनाओं में भविष्य की आबादी के हिसाब से आवासीय क्षेत्र तय होंगे। रोजगार-कारोबार के लिए आर्थिक गतिविधियों के क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। सड़क और यातायात नेटवर्क को शहरों के आपसी संपर्क के अनुरूप तैयार किया जाएगा। जल निकासी, पेयजल, सड़क और अन्य नागरिक सुविधाओं का ढांचा आबादी बढ़ने से पहले तैयार करने पर जोर रहेगा।
जीआइएस तय करेगा विस्तार की दिशा
जीआइएस आधारित नियोजन से भूमि उपयोग, आवासीय क्षेत्र, सड़क नेटवर्क, जल निकासी और निर्माण गतिविधियों को चिह्नित किया जाएगा। इससे शहरों के बेतरतीब फैलाव के बजाय निर्धारित क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। द्वितीय और तृतीय श्रेणी के निकायों के लिए भी जीआइएस आधारित मास्टर प्लान तैयार किए जा रहे हैं।
