राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड के सात उत्पादों को भौगोलिक सकेंतांक (ज्योग्राफिक इंडिकेशन) प्राप्त हुआ है। इनमें कुमाऊं च्यूरा आयल, मुनस्यारी राजमा, उत्तराखंड का भोटिया दन, उत्तराखंड ऐंपण, उत्तराखंड रिंगाल क्राफ्ट, उत्तराखंड ताम्र उत्पाद और उत्तराखंड थुलमा शामिल हैं। इससे इन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है। बौद्धिक संपदा भारत कार्यक्रम के अंतर्गत कृषि मंत्री सुबोध उनियाल व गणेश जोशी ने संबंधित विभाग को इनके प्रमाण पत्र वितरित किए।

सोमवार को सचिवालय स्थित वीर चंद्र सिंह गढ़वाली सभागार में बौद्धिक संपदा भारत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि राज्य के लिए यह गौरव का विषय है कि यहां के उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल रही है। वोकल फार लोकल और स्थानीय उत्पाद के प्रचार-प्रसार में जीआइ टैग महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उत्तराखंड में और भी ऐसे उत्पाद हैं जो भौगोलिक क्षेत्र विशेष के आधार पर अपनी वैश्विक पहचान बना रहे हैं। अभी तक तेजपत्ता जीआइ टैग प्राप्त करने वाला उत्पाद था। उन्होंने कहा कि अब सरकार ने उत्तराखंड मंडुवा, उत्तराखंड झंगोरा, उत्तराखंड बुरांस शरबत, उत्तराखंड काला भट्ट, उत्तराखंड चौलाई, रामदाना, अल्मोड़ा लाखोरी मिर्च, उत्तराखंड पहाड़ी तोर दाल व उत्तराखंड माल्टा फ्रूट जैसे 11 कृषि उत्पादों का जीआइ टैग लिए जाने के कार्य पर भी आवेदन कर दिया है।

उद्योग मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि जिन उत्पादों को जीआइ टैग के प्रमाण पत्र प्राप्त हुए हैं अब उनकी बाजार में मांग बढ़ेगी। इससे उत्पादकों को सीधा लाभ प्राप्त होगा। कार्यक्रम के दौरान तकनीकी कार्यशाला का भी आयोजन किया गया, जिसमें जीआइ टैग के संबंध में जानकारी प्रदान की गई।

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के सलाहकार भाष्कर खुल्बे और केंद्रीय सचिव अनुराग जैन ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये शिरकत की। इस दौरान पदमश्री रजीकांत, उप रजिस्ट्रार टीएम एंड जीआइ सचिन शर्मा, केंद्रीय संयुक्त सचिव श्रुति सिंह, राजेंद्र रतनू, सचिव कृषि आर मीनाक्षी सुंदरम व सचिव उद्योग राधिका झा भी उपस्थित थीं।

यह भी पढ़ें:-देहरादून में काश्तकारों को मेहनत के इनाम के साथ सेब महोत्सव संपन्न

Edited By: Sunil Negi