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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 05, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

मातृ मृत्यु दर में प्रदेश में आई 12.5 प्रतिशत की गिरावट, CM धामी बोले- यह सामूहिक प्रयासों का है परिणाम

Published: Fri, 05 Sep 2025 11:01 AM (IST)

उत्तराखंड ने मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। मातृ मृत्यु अनुपात 2020-21 में 104 से घटकर 2022-23 ...और पढ़ें

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। जागरण
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। जागरण

HighLights

  1. एमएमआर 104 से घटकर 91 पर पहुंचा |
  2. 12.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज |
  3. सरकार के प्रयासों से मिली सफलता |

राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। उत्तराखंड ने मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में अहम प्रगति दर्ज की है। देश में मातृ मृत्यु पर जारी विशेष बुलेटिन के अनुसार, उत्तराखंड का मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर) वर्ष 2020-21 में 104 से घटकर वर्ष 2022- 23 में 91 पर आ गया है।

इसमें 13 अंकों की कमी आई है। साथ ही मातृ मृत्यु में 12.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि को राज्य सरकार की समर्पित नीतियों और सभी स्वास्थ्य कर्मियों व सामूहिक सहभागिता का परिणाम बताया है। उन्होंने मातृ स्वास्थ्य को और मजबूत बनाने के लिए सतत प्रयास जारी रखने का संकल्प भी दोहराया।

उत्तराखंड में मातृ मृत्यु दर काफी अधिक थी। इसे देखते हुए प्रदेश सरकार की ओर से लगातार सकारात्मक कदम उठाए गए। परिणाम स्वरूप इसमें अब कमी दर्ज की गई है। सचिव स्वास्थ्य डा आर राजेश कुमार ने कहा कि मातृ स्वास्थ्य सरकार व विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यह उपलब्धि हमारे समर्पित स्वास्थ्यकर्मियों, सरकारी संस्थानों और सामुदायिक भागीदारों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि मातृ मृत्यु में कमी लाने के लिए विभाग ने लगातार प्रयास किए। इसके तहत मातृ मृत्यु निगरानी एवं प्रतिक्रिया के तहत मातृ मृत्यु की समयबद्ध सूचना और गहन विश्लेषण के आधार पर त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई की गई।

गर्भवती महिलाओं व परिवारों में जोखिम-चिह्नों की शीघ्र पहचान और आपात स्थितियों में तत्परता से स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई गई। लक्ष्य-प्रमाणित प्रसव कक्ष और मातृत्व शल्य कक्ष के विस्तार से सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक सेवाएं प्रदान की गईं।

संस्थान आधारित प्रसव को प्रोत्साहन दिया गया। इनके लिए आपातकालीन परिवहन व्यवस्था भी मुहैया कराई गई। 57,000 से अधिक गर्भवती महिलाओं की हीमोग्लोबिन जांच और स्थिति-विशिष्ट उपचार करने के साथ ही सामुदायिक स्तर पर व्यापक स्क्रीनिंग की गई।