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फार्मेसी में दाखिले से पहले जरा संभलकर, वरना डिग्री हाथ में होगी... लाइसेंस नहीं

Published: Thu, 01 Oct 2026 12:31 PM (IST)

उत्तराखंड फार्मेसी काउंसिल ने छात्रों को फार्मेसी में दाखिला लेने से पहले इंटरमीडिएट की अंकतालिका की अच्छी तरह जांच करने की चेतावनी दी है।

फार्मासिस्ट के रूप में पंजीकरण नहीं हो सकेगा। इस तस्वीर का उपयोग सांकेतिक रूप में किया गया है।

फार्मासिस्ट के रूप में पंजीकरण नहीं हो सकेगा। इस तस्वीर का उपयोग सांकेतिक रूप में किया गया है।

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जागरण संवाददाता, देहरादून। फार्मेसी में दाखिला लेने से पहले इंटरमीडिएट की अंकतालिका अच्छी तरह जांच लें। विज्ञान वर्ग के अनिवार्य विषय में फेल होने के बावजूद यदि छात्र ने डीफार्मा या बीफार्मा में दाखिला ले लिया तो पढ़ाई पूरी करने के बाद भी उसका फार्मासिस्ट के रूप में पंजीकरण नहीं हो सकेगा।

उत्तराखंड फार्मेसी काउंसिल ने ऐसे मामलों को देखते हुए प्रदेश के सभी फार्मेसी शिक्षण संस्थानों को फिर चेतावनी दी है। काउंसिल के रजिस्ट्रार केएस फर्स्वाण ने संस्थानों को पत्र भेजकर वर्ष 2026 में प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थियों की इंटरमीडिएट की अंकतालिका और पात्रता की जांच करने के निर्देश दिए हैं।

काउंसिल के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें संस्थानों ने निर्धारित शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं करने वाले छात्रों को भी फार्मेसी पाठ्यक्रम में दाखिला दे दिया। दो या चार साल की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब छात्र पंजीकरण के लिए काउंसिल पहुंचे तो उन्हें पात्रता पूरी नहीं होने की जानकारी मिली। ऐसे छात्रों का पंजीकरण नहीं हो सका।

एक विषय में फेल होने पर भी नहीं बनती पात्रता
फार्मेसी एक्ट 1948 के तहत बने एजुकेशन रेगुलेशन-2020 के अनुसार फार्मेसी पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए इंटरमीडिएट में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान तथा गणित या जीव विज्ञान के साथ विज्ञान वर्ग से उत्तीर्ण होना जरूरी है। बीफार्मा के लिए अंग्रेजी विषय भी अनिवार्य है। निर्धारित विषयों में पात्रता पूरी नहीं करने वाले अभ्यर्थी को फार्मेसी की पढ़ाई में प्रवेश नहीं दिया जाना चाहिए।

पढ़ाई के बाद सामने आती है पात्रता की कमी
काउंसिल के अनुसार कई मामलों में प्रवेश के समय शैक्षणिक योग्यता की जांच नहीं होने से छात्रों को बाद में परेशानी उठानी पड़ रही है।

फीस और कई साल की पढ़ाई पर खर्च करने के बाद पंजीकरण के समय पात्रता पूरी नहीं होने की जानकारी मिलती है। इससे छात्रों का समय और पैसा दोनों बर्बाद होते हैं। ऐसे मामलों को लेकर कई अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट में वाद भी दायर किए हैं।

96 कॉलेज, 24 विश्वविद्यालय और 21 पॉलीटेक्निक
प्रदेश में 96 कॉलेज, 24 विश्वविद्यालय और 21 पॉलीटेक्निक में फार्मेसी के पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं। इनमें दो वर्षीय डीफार्मा, चार वर्षीय बीफार्मा, छह वर्षीय फार्मडी और दो वर्षीय एमफार्मा पाठ्यक्रम शामिल हैं।

काउंसिल ने बताया कि सभी संबंधित संस्थानों को पहले भी लिखित रूप से प्रवेश के समय इंटरमीडिएट की अंकतालिका जांचने के निर्देश दिए जा चुके हैं। पिछले वर्ष भी संस्थानों को इस संबंध में आगाह किया गया था।

काउंसिल ने अब 2026 के दाखिलों के दौरान संस्थानों से पात्रता की जांच में विशेष सावधानी बरतने को कहा है, ताकि पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्रों के पंजीकरण में विवाद की स्थिति पैदा न हो और उनका भविष्य प्रभावित न हो।