पर्वतारोहण को खोलने से पहले 17 नई चोटियों का होगा EIA, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मांगे प्रपोजल
उत्तराखंड में 17 नई चोटियों को पर्वतारोहण और ट्रेकिंग के लिए खोलने से पहले उनके पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन किया जाएगा।

HighLights
उत्तराखंड में 17 नई चोटियों पर पर्वतारोहण से पहले आकलन
संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिकी पर प्रभाव का अध्ययन होगा
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने चार संस्थानों से प्रस्ताव मांगे
केदार दत्त, देहरादून । मध्य हिमालयी राज्य उत्तराखंड में पर्वतारोहण व ट्रेकिंग जैसी साहसिक पर्यटन गतिविधियों पर सरकार विशेष जोर दे रही है। वर्तमान में 83 चोटियां इन गतिविधियों के लिए खुली हैं।
इसके साथ ही केंद्र सरकार की ओर सेEIA 17 अन्य चोटियों को भी खोलने की अनुमति दी जा चुकी है, लेकिन इससे पहले पर्वतारोहण व ट्रेकिंग अभियानों से इनमें पड़ने वाले पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन कराया जाएगा। मुख्य सचिव के निर्देशों के क्रम में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस सिलसिले में डब्लूआइआइ व एनआइएचई समेत चार संस्थानों से प्रस्ताव मांगे हैं।
40 नई चोटियां पर्वतारोहण व ट्रेकिंग के लिए खोलने की मिली थी अनुमति
हिमालयी क्षेत्र अपनी समृद्ध जैवविविधता और संवेदनशील पारिस्थितिकी के लिए जाना जाता है। ऐसे में नई चोटियों पर पर्वतारोहण और ट्रेकिंग गतिविधियां शुरू करने से पहले उनके पर्यावरणीय प्रभाव आकलन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यद्यपि, वर्तमान में जिन चोटियों पर यह अभियान संचालित हो रहे हैं, उनके लिए पूर्व में ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया।
अलबत्ता, वर्ष 2022 में केंद्र सरकार ने 40 नई चोटियां पर्वतारोहण व ट्रेकिंग के लिए खोलने की अनुमति दी थी। तब यह मामला न्यायालय में गया। न्यायालय ने यह गतिविधियां प्रारंभ करने से पहले इन चोटियों का पर्यावरणीय प्रभाव आकलन कराने के आदेश दिए थे। यह हो चुका है और अब इन्हें खोलने के लिए भी न्यायालय की हरी झंडी का इंतजार है।
इस बीच इसी साल अगस्त में केंद्र ने 17 और नई चोटियों को पर्वतारोहण व ट्रेकिंग के लिए खोलने के प्रस्ताव को हरी झंडी दी। इन्हें साहसिक पर्यटन गतिविधियों के लिए खोलने से पहले इनका पर्यावरणीय प्रभाव आकलन कराने का निर्णय लिया गया। हाल में हुई बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इसके निर्देश दिए थे।
बोर्ड के सदस्य सचिव डा. पराग मधुकर धकाते के अनुसार इस कार्य के दृष्टिगत भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्लूआइआइ) देहरादून, जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान (एनआइएचई) कोसी कटारमल, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय और कुमाऊं विश्वविद्यालय से प्रस्ताव मांगे गए हैं। प्रस्ताव मिलने के बाद किसी एक संस्थान का चयन किया जाएगा, जो यह अध्ययन करेगा। इसके माध्यम से वन्यजीवों, प्राकृतिक आवासों, जलस्रोतों और पर्वतीय पारिस्थितिकी पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों समेत अन्य पर्यावरणीय चुनौतियों का आकलन किया जाएगा।
