जागरण संवाददाता, देहरादून। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम को तर्क संगत और रोजगारपरक बनाने की कवायद शुरू हो चुकी है। केंद्रीय सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्रालय के अधीन भारतीय पुनर्वास परिषद जो कि विशेष शिक्षा के पाठ्यक्रमों की मान्यता और संचालन के लिए एक संवैधानिक निकाय है। इसके अंतर्गत शिक्षा के माध्यम से विशेष शिक्षा पाठ्यक्रम के परिनियम और अधिनियम को पुन: संरचित करने के लिए दूसरी बैठक उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय परिसर में कुलपति प्रो. ओमप्रकाश सिंह नेगी के अध्यक्षता में आयोजित की गई।

बैठक में यूजीसी के दूरस्थ शिक्षा सचिव डॉ. ए कपूर ने यूजीसी रेगुलेशन के अधीन ही भारतीय पुनर्वास परिषद के बीएड. विशेष शिक्षा (दूरस्थ माध्यम) के पाठ्यक्रमों के निर्माण का सुझाव दिया, जिससे भविष्य में छात्रों को मान्यता संबंधी दिक्कतों का सामना न करना पड़े। बीएड विशेष शिक्षा दूरस्थ माध्यम के रूल और रेगुलेशन के निर्माण के लिए बनी कमेटी अपने सुझाव देगी।

सेवानिवृत्त प्रो. राम मित्तल, इग्नू के प्रो. अमिताभ मिश्रा, एसएनडीटी यूनिनर्सिटी से प्रो. सुजाता भान ने अपना प्रस्तुतीकरण दिया। इस पर बौद्धिक क्षमता के सशक्तिकरण के लिए राष्ट्रीय संस्थान सिकंदराबाद की डायरेक्टर जयंती नारायण, उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन ओपन यूनिवर्सिटी के प्रो. प्रदीप कुमार पांडे, यशवंत राव चौहान महाराष्ट्र मुक्त विश्वविद्यालय नासिक से डॉ. शर्मिष्ठा ओक, भीमराव अंबेडकर ओपन यूनिवॢसटी गुजरात से डॉ. निगम पांड्या, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय से डॉ. सिद्धार्थ पोखरियाल ने विभिन्न बिंदुओं पर अपने विचार और सुझाव दिए।

इसके आधार पर कमेटी के अध्यक्ष कुलपति प्रो. ओमप्रकाश सिंह नेगी ने 21 जून तक सभी के द्वारा सुझाव को ईमेल के माध्यम से दिया जाने की बात कही। बैठक का संचालन भारतीय पुनर्वास परिषद के सदस्य सचिव डॉ. सुबोध कुमार द्वारा किया गया। परिषद से सहायक निदेशक डॉ. संदीप तांबे और सहायक परीक्षा नियंत्रक संदीप ठाकुर उपस्थित रहे।

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Edited By: Raksha Panthri